महिला पुलिस भी छेड़छाड़ से सुरक्षित नहीं, तो फिर आम महिलाओं की बात ही क्या। दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला कांस्टेबल से छेड़छाड़ के एक मामले को गंभीरता से लेते हुए सवाल उठाए हैं कि पीड़िता आरोपियों को सबक सिखाने की बजाए उनके खिलाफ मात्र प्राथमिकी दर्ज करवाकर अपना कर्तव्य पूरा कर ले तो क्या होगा।
सोचिए अगर उन्हें महिला के पुलिस में होने का पता नहीं चलता तो उसका क्या हाल करते। फिलहाल अदालत ने महिला कांस्टेबल व तीनों आरोपियों के बीच हुए समझौते को नामंजूर करते हुए आरोपियों के माता-पिता को तलब किया है।
मामला न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की अदालत का है। महिला कांस्टेबल व आरोपी टोनी खान व उसके दो अन्य साथियों ने समझौता होने के आधार पर प्राथमिकी रद्द करने के लिए याचिका दायर की है।
आरोप है कि मायापुरी थाना क्षेत्र में ड्यूटी खत्म कर रात करीब 10 बजे महिला कांस्टेबल अपने घर जा रही थी। सादी वर्दी में होने के कारण टोनी खान व उसके दो साथियों को पता नहीं चला कि वह कांस्टेबल है।