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कंप्यूटर युग में लेखन-हस्तकला को जीवित रखने की कोशिश में जुटे हैं मोहम्मद जुबेर

Wed, 18 Nov 2020 07:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पांडेय, नई दिल्ली
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मोहम्मद जुबेर - फोटो : amar ujala
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दिल्ली के वेलकम निवासी मोहम्मद जुबेर उन गिने-चुने लोगों में शामिल हैं जो कंप्यूटर के युग में लेखन हस्तकला (कैलीग्राफी आर्ट) को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। बीते 8 वर्षों से मोहम्मद जुबेर, मुस्तफाबाद केंद्र पर छात्रों को लेखन हस्तकला का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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मोहम्मद जुबेर के मुताबिक लेखन हस्तकला महाभारत काल से चली आ रही है। महाभारत के श्लोकों की लिखावट में इसे साफ तौर पर देखा जा सकता है। मुगल और ब्रिटिश काल के दौरान भारत में लेखन हस्तकला का विकास तेजी से हुआ। आज से 30 साल पहले तक इसका खूब इस्तेमाल होता था, लेकिन कंप्यूटर के युग में लेखन हस्तकला पूरी तरह कैलीग्राफी (कंप्यूटर द्वारा निर्मित डिजाइन) में तब्दील हो रही है। 

इस वजह से इस कला के जानकारों की संख्या दिनोंदिन घट रही है। मोहम्मद जुबेर के मुताबिक कंप्यूटरीकृत कैलीग्राफी मुद्रण कला, परंपरागत हस्त लेखन कला से बिल्कुल अलग है, लेकिन कंप्यूटरीकृत कैलीग्राफी में इन दोनों का समावेश हो सकता है।
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बदले स्वरूप में हो रहा खूब इस्तेमाल
कंप्यूटरीकृत कैलीग्राफी का इस्तेमाल आज भी विवाह और अन्य समारोहों के निमंत्रण पत्रों, फॉन्ट डिजाइन, मुद्रण कला, मौलिक हस्त निर्मित प्रतीक चिह्न (लोगो) निर्माण, धार्मिक कला सामग्री, घोषणा पत्रों, ग्रॉफिक डिजाइन, स्मृति पत्रों आदि में होता है। फिल्म और टेलीविजन जगत में रंग मंच की सहायक सामग्री और चलचित्रों में भी इसका खूब उपयोग होता है। इसके अलावा शपथ पत्रों, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों, मानचित्रों और अन्य लेखन कार्यों में भी कैलीग्राफी का विशेष स्थान है। बस, लेखन हस्तकला की जगह अब कंप्यूटरीकृत कैलीग्राफी ने ले ली है।

अक्षरों को उभारने की कला
लेखन हस्तकला को अक्षरांकन भी कहते हैं। यह लेखन की एक दृश्यात्मक शैली है। यह चौड़े नोक वाले लेखन उपकरणों जैसे कि ब्रश आदि के द्वारा अक्षरों को एक पटल पर उभारने की कला है। समकालीन लेखन हस्तकला को ऐसे परिभाषित किया जा सकता है कि ‘संकेतों को एक अर्थपूर्ण, सुव्यवस्थित और कौशलपूर्ण तरीके से आकार प्रदान करना लेखन हस्तकला है।’ मौजूदा समय में दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित दिल्ली सरकार द्वारा संचालित उर्दू अकादमी में 12वीं के बाद छात्रों को लेखन हस्तकला का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा राजधानी में 4 स्थानों वेलकम, मुस्तफाबाद, खजूरी और रोहिणी में प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं।

हुनर हाट में मिला प्रतिभा दिखाने का मौका
मोहम्मद जुबेर हिंदी, उर्दू, पंजाबी, अरबी और अंग्रेजी में लेखन हस्तकला के जानकार हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय की उस्ताद योजना के तहत मोहम्मद जुबेर के हुनर  को पहचाना गया है। उन्हें हुनर हाट में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। हुनर हाट में जुबेर ने अपनी 30 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया है। उन्होंने शायरी, धार्मिक पंक्तियों, नेम प्लेट, लोगो, दीवार घड़ी और कलम पर अपनी लेखन हस्तकला को उकेरा है।

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