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दिल्ली में छठ पूजा पर पाबंदी, ट्रेनों में सीटें नहीं, जाएं तो कहां...

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 18 Nov 2020 05:42 AM IST
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आनंद विहार रेलवे स्टेशन के बाहर... - फोटो : amar ujala
छठ महापर्व है। परंपरा के अनुसार व्रती इस पर्व को बीच में नहीं छोड़ सकते। नदी, तालाब और पोखर के किनारे समूह में ही इस पर्व को मनाया जाता है, लेकिन कोरोना की वजह से दिल्ली में सामूहिक रूप से इस पर्व को मनाने पर लगी पाबंदी की वजह से व्रतियों में मायूसी है।


ऐसे में दिल्ली में रह रहे ज्यादातर प्रवासी अपने मूल निवास स्थान पर ही इस महापर्व में शरीक होने व मनाने के लिए स्टेशन तो पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों को मायूसी ही मिल रही है, क्योंकि अनारक्षित ट्रेनें चल नहीं रही हैं और आरक्षित ट्रेनों में सीटें सभी फुल हैं। लिहाजा स्पेशल ट्रेनें चलने के ही इंतजार में स्टेशन पर डेरा डाले हुए हैं। भीड़ के आगे रेल प्रशासन की सभी तैयारियां बौनी साबित हो रही हैं।




टिकट खिड़की व प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की जद्दोजहद

बड़ी संख्या में पूर्वांचली आनंद विहार स्टेशन पर ही डेरा डाले हुए हैं। बार-बार टिकट काउंटर पर पहुंचकर स्पेशल ट्रेनों से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। टिकट खिड़की तक पहुंचते हैं, लेकिन आरक्षित बर्थ नहीं मिलने से वापस परिसर में लगे शामियाने में लौट रहे हैं। कई बार प्लेटफॉर्म पर पहुंचने की जिद प्रशासन से करते दिखाई पड़ते हैं, लेकिन जब आरक्षित टिकट मांगा जाता है तो वापस शामियाने में ही लौटने को मजबूर हैं।


दरअसल ये वह लोग हैं, जो किसी भी हालत में छठ पर्व में शरीक होने के लिए अपने मूल निवास स्थान जाना चाहते हैं। ट्रेनों की संख्या कम होने और अनारक्षित ट्रेनें नहीं चलने से उनकी परेशानी बढ़ी हुई है। पूर्वांचल जाने के लिए पूरे परिवार के साथ स्टेशन पहुंचे सुनील कुमार का कहना है कि सरकार को अगर छठ पर्व मनाने की अनुमति नहीं देनी थी तो इसकी घोषणा पहले होनी चाहिए थी। एक तो ट्रेनों की संख्या कम है, दूसरी ओर दिल्ली में छठ घाट जाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में धार्मिक आयोजन में कैसे कोई शरीक होगा।


आनंद विहार स्टेशन की तरह ही नई दिल्ली स्टेशन का भी यही नजारा देखने को मिल रहा है। अजमेरी गेट हो या पहाड़गंज, दोनों तरफ बड़ी संख्या में पूर्वांचली यात्रा करने के लिए पहुंचे हुए हैं, लेकिन ट्रेनों की संख्या की कमी उन्हें बार-बार यही संकेत दे रही है कि इस बार न तो वह दिल्ली में ही सामूहिक रूप से व्रत में शरीक हो सकेंगे और न ही अपने मूल निवास स्थान।


बिना टिकट प्लेटफॉर्म पर जाने की अनुमति नहीं

कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार उन्हें ही प्लेटफॉम तक जाने की अनुमति है जिनके पास कन्फर्म टिकट है। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण किसी को भी स्टेशन परिसर से प्लेटफॉर्म तक जाने की अनुमति नहीं है। स्टेशन के बाहर तो सोशल डिस्टेंसिंग जरा सी भी नहीं है, लेकिन प्रवेश के बाद प्लेटफॉर्म पर जरूर लोगों की संख्या अधिक नहीं दिखी। प्लेटफॉर्म पर भी उन्हें ही प्रवेश दिया जा रहा है जिनकी ट्रेन प्लेटफॉर्म पर लगी है।


ट्रेनों के इंतजार में घंटों टेंट में बिता रहे

ट्रेनों की संख्या कम होने की वजह से स्टेशन परिसर के बाहर ही लोग टेंट में डेरा डाले हुए हैं। रेलवे की तरफ से बेहतर इंतजाम भी हैं, लेकिन भीड़ के सामने स्पेशल ट्रेनों की कमी सभी इंतजाम को धता बता रही हैं, क्योंकि स्टेशन पर पहुंचने वालों की सिर्फ एक ही चाहत है कि वह ट्रेन में बैठ जाएं।
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सीमित स्पेशल ट्रेनों की वजह से बढ़ी परेशानी

कोरोना की वजह से नियमित ट्रेनों के पहिये थमे हुए हैं। स्पेशल ट्रेनें चलाकर रेलवे लोगों की राह आसान तो कर रही है, लेकिन संख्या के लिहाज से स्पेशल ट्रेनें नाकाफी साबित हो रही है। अनारक्षित व लोकल ट्रेनें नहीं चलने की वजह से भी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।


ऑनलाइन टिकट भी है राह में रोड़ा

कई लोग नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली समेत अन्य जगहों पर आरक्षित टिकट लेने तो पहुंच रहे हैं, लेकिन लंबी-लंबी लाइन में लगने के बाद जब उनकी बारी टिकट लेने की आती है, तो सभी ट्रेनों में तत्काल टिकट फुल हो जाता है। दरअसल ऑनलाइन टिकट बुकिंग की वजह से मजदूर व अनपढ़ लोग यात्रा टिकट पाने से वंचित रह रहे हैं। ई-टिकटिंग के बढ़ते प्रचलन ने काउंटर से टिकट लेने वालों को हैरान कर रखा है। राजधानी के विभिन्न बुकिंग काउंटरों पर देर रात से लोग टिकट के लिए लाइन लगा लेते हैं। जद्दोजहद प्लेटफॉर्म से ही शुरू हो रही है। सबसे पहले तो वे टिकट काउंटर पर लंबी-लंबी कतारों में जूझ रहे हैं, फिर आरक्षित टिकट के लिए।


क्या कहते हैं पूर्वांचली

छठ कोई आम पर्व नहीं है। इस पर्व को मनाने से रोकने का कदम ठीक नहीं है। घाट पर जाने की अनुमति सरकार को देनी चाहिए। उगते हुए और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देना होता है। ऐसे में कोई कैसे बिना घाट पर पहुंचे इस त्योहार को मना सकेगा। बिना सोचे-समझे निर्णय लिया गया।

-संगीता झा


घाट पर नहीं जाने देने की बात तो समझ में आती है, लेकिन सोसाइटी में एक जगह एकत्रित होकर पूजा करने पर पाबंदी समझ से बाहर है। आखिर व्रती इस पूजा को कैसे करें। सोशल डिस्टेंसिंग की बात तो ठीक है, लेकिन इतने बड़े यमुना घाट पर बेहतर प्रबंध कर इस पूजा का आयोजन कराया जा सकता था।

-चंदा झा


यह त्योहार सामूहिक रूप से ही मनाया जाता है। परंपरा को बाधित करना ठीक नहीं है। एक तरफ तो मूल प्रदेश जाने का कोई संसाधन नहीं है और दूसरी तरफ घाट पर जाने की अनुमति नहीं है। सरकार को कोई हक नहीं है कि धार्मिक कार्यों में किसी तरह का दिशा-निर्देश तय करे।

-गौरी शंकर


सोसाइटी में कम से कम इस पर्व के आयोजन की छूट मिलनी चाहिए थी। कई लोग पहले भी नदी किनारे नहीं जाते थे, वह अपने आसपास के पार्कों में ही इस पूजा का आयोजन करते थे, लेकिन इस बार पूजा पर ही मानों पाबंदी लगा दी गई हो।

-उमेश पांडेय


काफी संख्या में स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रहीं : रेलवे

रेलवे का कहना है कि छठ महापर्व को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में स्पेशल ट्रेनें पूर्वांचल के लिए चलाई जा रही हैं। यात्रियों की संख्या को ध्यान में रख बुधवार को भी कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, ताकि सभी लोगों को यात्रा कराई जा सके।


आज कटिहार व मुजफ्फरपुुर के लिए स्पेशल ट्रेन

बुधवार को ट्रेन संख्या 04020 आनंद विहार से कटिहार के लिए शाम छह बजे चलेगी। मार्ग में कानपुर, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय व नौगछिया स्टेशनों पर यह ट्रेन रुकेगी। मुजफ्फरपुर के लिए एक अन्य ट्रेन आनंद विहार से (04022) शाम 5:30 बजे चलेगी। मार्ग में मुरादाबाद, बरेली, सीतापुर, गोरखपुर, छपरा तथा हाजीपुर स्टेशनों पर रुकेगी।
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