शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का भाषण शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है। दोनों ही बड़ी हस्तियों से छात्रों को रूबरू होने का सपना टूट सकता है। नरेंद्र मोदी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा दोनों एजुसेट से बच्चों को संबोधित करेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत की वजह से बच्चे महरूम रहेंगे।
कई स्कूलों में न तो जेनरेटर है और न ही टीवी। कहीं बैटरी है तो बैकअप नहीं। ऐसे में स्कूल प्रिंसिपलों के लिए ये निर्देश किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। निजी स्कूलों में खुद के बूते एजुसेट लगाने को कहा गया है। नहीं तो टीवी के जरिए सुनना होगा।
यह है जमीनी हकीकत
शहर में 385 प्राइमरी स्कूल और 61 सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। जिनमें एजुसेट लगी है। इसके अलावा 27 स्कूलों में एसआईटी (सैटेलाइट इंटरएक्टिंग टर्मिनल) लगे हुए है। जिनमें से महज चार ही काम कर रहे हैं। जबकि 88 डीटीएच पूरी तरह खराब है। इसके अलावा करीब 40 फीसदी स्कूलों के एजुसेट के यूपीएस नहीं होने से बंद पड़े हैं।
बाकी अन्य स्कूलों में एजुसेट बिजली पर निर्भर हैं। यदि बिजली नहीं आई तो वहां पर जेनरेटर या इनवर्टर का कोई प्रबंध नहीं हैं। दो दर्जन से अधिक स्कूलों में एजुसेट का एंटीना ही चोरी हो चुका है। बता दें कि साल 2008 में सरकारी स्कूलों में एजुसेट लगाए गए थे।