प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
कुछ छात्रों ने पीएम से प्रश्न किया है कि वे अपनी परीक्षा का तनाव कैसे कम करते थे? क्या उन्हें भी परीक्षा से डर लगता था? परीक्षा का तनाव अभिभावकों और शिक्षकों का बनाया हौव्वा है। क्योंकि वे हमारी दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं, जिससे हमारे अंदर द्वेष की भावना आ जाती है।
मोदी सर हमारी इच्छा कोई नहीं पूछता है, क्योंकि इंजीनियरिंग या मेडिकल की डिग्री नहीं होगी तो नौकरी भी नहीं मिलेगी। पेरेंट्स ने कहा, इंजीनियरिंग या मेडिकल में ही अच्छा भविष्य हैं, क्योंकि इन्हीं दो सेक्टर में नौकरी मिलेगी, क्या सच में यदि वे अच्छे नंबर नहीं ला पाते हैं तो उन्हें आगे चलकर कोई नौकरी नहीं मिलेगी? इसीलिए हम बेहद प्रेशर में हैं? आपने बेहद अच्छी पुस्तक लिखी है, लेकिन पेरेंट्स व टीचर को कौन समझाएगा। बच्चों के साथ आपको उनकी भी क्लास लेनी चाहिए।
पेरेंट्स और सोसायटी के प्रेशर में अपनी इच्छा भूले
छात्रों ने लिखा है कि अभिभावकों और समाज के दबाव के बीच वे अपनी इच्छाओं को भूल गए हैं? क्योंकि उन्हें अब डर सताता है कि यदि उनके दोस्तों व रिश्तेदार के बच्चों से कम नंबर आते हैं तो फिर उनकी बेइज्जती होगी? वे याद तो करते हैं, लेकिन परीक्षा केंद्र पहुंचते ही नर्वस हो जाते हैं, जिसके चलते जानकारी होने के बाद भी प्रश्नों का सही जवाब नहीं लिख पाते हैं? भारत में इंजीनियरिंग या मेडिकल की डिग्री ही इंटेलिजेंस का आधार है? क्या दूसरे प्रोग्राम की पढ़ायी या व्यवसाय का कोई भविष्य नहीं है?