लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की सुनामी ने कमजोर उम्मीदवारों को ही नहीं, बाहरी की भी नैया पार लगा दी।
इनमें कुछ उम्मीदवार लंबे समय से अपने स्तर पर राजनीति कर रहे थे तो कुछ कांग्रेस, बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
इसी पंक्ति में दिल्ली के दो नेताओं की भी लॉटरी लग गई। आपस में रिश्ते से समधी दिल्ली के धनी इन दोनों नेताओं में से एक यूपी तो दूसरे राजस्थान से संसद में पहुंचे हैं।
कांग्रेस छोड़ा तो मिली जीत
दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी गांव के कंवर सिंह तंवर ने लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के अमरोहा संसदीय सीट से जीत दर्ज की है।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के हुमेर अख्तर को डेढ़ लाख से अधिक मतों से हराया। वह करीब छह साल से राजनीति में जगह बनाने के लिए हाथ पैर मार रहे थे।
लोस चुनाव से पूर्व तंवर कांग्रेस में थे। 2009 का लोस चुनाव बसपा के टिकट पर दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से लड़ा था। 2008 में छतरपुर से विस का चुनाव लड़ा और पिछले साल हुए विस चुनाव में भी वे यहीं से टिकट मांग रहे थे।
नामी खिलाड़ी को हराकर पहुंचे संसद
दूसरे राज्य से सांसद बनने वाले दक्षिण दिल्ली के जोनपुर गांव के निवासी सुखवीर सिंह जोनपुरिया हैं। वह राजस्थान के सवाई माधोपुर से भाजपा के टिकट पर सांसद बने।
उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार व पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन को एक लाख 35 हजार मतों से मात दी। जोनपुरिया भी चुनाव से ठीक पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे।
इससे पहले वह किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं थे। उन्होंने वर्ष 2005 में हरियाणा के बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विस चुनाव जीता था।
दहेज में दिया था हेलीकॉप्टर
वर्ष 2009 में हरियाणा विस चुनाव में जोनपुरिया सोहना विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़े, लेकिन हार गए थे।
जोनपुरिया की बेटी का रिश्ता तंवर के बेटे से हुआ है। यह शादी काफी चर्चित रही क्योंकि जोनपुनिया ने दहेज में हेलीकॉप्टर दिया था।
अब इन दोनों रिश्तेदारों की जोड़ी संसद में क्या दम भरेगी यह देखना वाकई दिलचस्प होगा।