केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो दिल्ली में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए। मंगलवार शाम तक फिर से सरकार बनाने की संभावना तलाश रही आम आदमी पार्टी ने भी साफ कर दिया कि वे चुनाव में जाने को तैयार हैं।
कांग्रेस और भाजपा पहले ही जोड़-तोड़ से सरकार बनाने की संभावना को नकार चुकी हैं।
राजनीतिक दल के नेता, प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी की शपथ के साथ ही दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जता रहे हैं।
ये है केजरीवाल का चुनावी पैंतरा!
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को मिले वोट का आंकलन भी शुरू कर दिया गया है। गेंद अब केंद्रीय नेतृत्व व राष्ट्रपति के पाले में है।
राजनीतिक विश्लेषक केजरीवाल के मुचलका न भरकर जेल जाने की घटना को भी चुनावी पैतरे से जोड़कर देख रहे हैं। आम चुनाव के परिणाम से भाजपा खुश है जबकि कांग्रेस व आप के तमाम एमएलए कुर्सी बचाने के लिए कुलबुलाने लगे हैं।
इस बीच भाजपा व कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वे न तो समर्थन लेंगे और न ही देंगे।
केजरीवाल की चिट्ठी से मिली हवा
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस प्रभारी डॉ. शकील अहमद तक ‘आप’ का संदेश सरकार बनाने में सहयोग करने की मांग के लिए पहुंचा। कांग्रेस नेता दावा कर रहे हैं कि ‘आप’ के नेता जनलोकपाल के मुद्दे को छोड़कर भी सरकार बनाने को तैयार थे।
मंगलवार शाम अरविंदर केजरीवाल की तरफ से उपराज्यपाल नजीब जंग को विधानसभा भंग न करने की गुजारिश वाली चिट्ठी देने से इसे और हवा मिली।
हालांकि, बुधवार सुबह केजरीवाल ने फिर चुनाव में जाने की घोषणा कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने कहा है कि वे हर स्थिति के लिए तैयार हैं।
'केजरीवाल को सत्ता की भूख है'
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि केजरीवाल छोटे बच्चे की तरह बार-बार खिलौना बदलने की मांग करते हैं।
कभी कहते हैं कि विधानसभा भंग करो, कभी कहते हैं सरकार बनाने के लिए जनता के बीच जाएंगे। कभी जनता के बीच माफी मांगने की बात करते हैं। मैं जनता से अपील करूंगा कि ऐसे व्यक्ति के हाथ सत्ता की चाबी न दें।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा कि केजरीवाल कोई आजादी की लड़ाई में जेल थोड़े ही न गए हैं। गरीब का मकान टूटने से बचाने या गरीबों को सुविधा दिलाने के लिए भी जेल नहीं गए। केजरीवाल को सत्ता की भूख है। वो संविधान व कानून को नहीं मानते।