राजधानी में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के वितरण के तौर पर चलाई जा रही दुकान में गैर राशन सामग्री बिक्री की छूट दिल्ली सरकार ने दे दी है। उसमें डीटीएच और मोबाइल रीचार्ज, टूर एंड ट्रेवल्स समेत अन्य सामान की बिक्री की जा सकेगी।
तर्क है कि इससे दुकान साफ सुथरी रहेगी, देर शाम तक खुलेगी। राशन दुकान उपभोक्ताओं का इसका फायदा मिलेगा तो दुकानदार दूसरे सामान की बिक्री करके अधिक लाभ कमा सकेंगे।
खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त एसएस यादव ने बताया कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार होगा। सहायक खाद्य आपूर्ति आयुक्त को आदेश जारी कर दिए गए हैं। नए आदेश से राशन कार्ड धारकों को काफी सहूलियत मिलेगी।
वैसे राशन दुकान खुलने का समय सुबह 9 बजे से दोपहर एक बजे तक और शाम को 3 बजे से 7 बजे तक है। लेकिन अधिक देर तक दुकान खुलेगी तो उस समय भी संचालन को राशन लेने जाने वाले को राशन देना होगा।
सज्जन सिंह यादव बताते हैं जहां दूसरी गतिविधियों से दुकानदार को आर्थिक लाभ होगा, वहीं ग्राहक को दूसरे सामान भी उसी दुकान से मिल जाएंगे। दुकान बंद रहने की शिकायत दूर होगी।
राशन दुकानदार ग्राहकों कोे आकर्षित करने के लिए दुकान का नवीनीकरण भी कराएगा। दुकान का महंगा किराया और मजदूरी का हवाला देकर काफी समय से दुकानदार अन्य गतिविधियों की अनुमति मांग रहे थे।
नहीं बेच सकेंगे शराब या मांस
गेहूं-चावल का आटा, मैदा, सूजी, दवा, शराब या मांस नहीं बेच सकेंगे। ऐसी कोई अन्य सामग्री भी नहीं बेच सकेंगे जिसके लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत होती है। ढाबे या चाय स्टाल अथवा हलवाई की दुकान के रूप में भी इस दुकान का इस्तेमाल नहीं होगा। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि एक महीने के सब्सिडी वाले गेहूं, चावल और चीनी के भंडारण की जगह दुकान में रखनी होगी।
डीसीएचएफसी को साल में 43.6 करोड़ का मुनाफा
दिल्ली को-ऑपरेटिव हाउसिंग फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन (डीसीएचएफसी) ने वित्त वर्ष 2013-14 में 43.6 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। इसके साथ ही लाभ कमाने वाली को-ऑपरेटिव कार्पोरेशन के मामले में डीसीएचएफसी नंबर-वन पर पहुंच गई है। इसमें दिल्ली सरकार का 96 फीसदी शेयर है।
न सिर्फ को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी बल्कि आमजन को भी डीसीएचएफसी लोन देती है। सरकारी कर्मचारियों को लोन में 0.5 फीसदी की छूट भी ब्याज में दी जाती है।
डीसीएचएफसी के चेयरमैन सुखबीर सिंह पंवार ने बताया कि अब शर्तों के साथ आमजन को भी लोन देना शुरू किया गया है। लोन देने की शर्तें आसान करने और फटाफट लोन स्वीकृति के कारण ही सालाना लाभ 43.6 करोड़ तक पहुंचा है।