दिल्ली हरियाणा सीमा पर स्थित है सुरखपुर। यह वहीं गांव है जिसे बीते साल नोटबंदी के बाद फरवरी 2017 में राजस्व विभाग ने कैशलेस लेनदेन करने वाला डिजिटल गांव घोषित किया था।
गांव में दो दुकानें है। इसमें एक दुकान गांव निवासी राजकुमारी अपने पति सूरत सिंह के साथ चलाती हैं। दुकान पर मौजूद राजकुमारी ग्राहक को सामान देकर उससे कैश पैसा लेती है। प्वाइंट ऑफ सेल (स्वाइप) मशीन होते हुए भी कैश लेने पर वह कहती हैं, ‘यह तो रोज का काम है।’
दुकान पर आने वाला हर शख्स डिजिटल घोषित गांव में कैश देकर ही सामान खरीद रहा है। गांव के ही निवासी व जलबोर्ड में कार्यरत रवि सोलंकी ने बताया कि ऐसा नहीं है कि लोगों के पास डेबिट कार्ड नहीं है। डिजिटल गांव घोषित करने से पहले प्रशासन ने यहां कैंप लगाकर सबके बैंक खाते खोले, डेबिट कार्ड भी दिया।
केवाईसी अपडेट किया गया। दो किराना स्टोर को स्वाइप मशीन भी उपलब्ध कराई गई। शुरुआत में लोगों ने उत्साह भी दिखाया, मगर मोबाइल नेटवर्क खराब होने के कारण धीरे-धीरे लोग इससे दूरी बनाने लगे।