पहले युवाओं पर फेसबुक का रंग चढ़ा था। दोस्तों से इसी पर चैटिंग और मैसेज करके बात होती थी लेकिन अब इसकी जगह ले ली है एप ने। जिनके माध्यम से नाम मात्र के ही खर्च में सात समंदर पार तक न सिर्फ बात होती है बल्कि वीडियो कॉलिंग से एक दूसरे को देखा भी जाता है।
इन दिनों एंड्रायड स्मार्ट फोन में युवा वाइबर, वाट्स एप, लाइन और स्काइप का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं। इसमें मोबाइल कॉल के मुकाबले बचत काफी है इसलिए युवा इसे ही इस्तेमाल करना बेहतर समझ रहे हैं।
कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के ज्यादातर युवाओं के फोन में 2जी और 3जी के अनलिमिटिड प्लॉन मिलेंगे, जिनसे वह अपनों से कनेक्ट रहते हैं। न सिर्फ गपशप बल्कि पढ़ाई-लिखाई में तकनीक के इस पहलू का इस्तेमाल बखूबी हो रहा है।
इसके जरिए फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स का आसानी से आदान प्रदान हो रहा है। एक निजी यूनिवर्सिटी में कार्यरत महेंद्र सेठी के कई दोस्त दूसरे देशों में रहते हैं।
उनसे बात करना पहले काफी महंगा पड़ता था, उनसे महीने में दो या तीन बार ही बात करता था लेकिन अब इनकी बदौलत मैं अक्सर इनसे वीडियो कॉलिंग पर संपर्क करता हूं।
एमबीए की छात्रा गरिमा कहती हैं कि संचार के इन नए माध्यमों से कनेक्टिविटी आसान हुई है। इससे देश दुनिया में कहीं भी रह रहे रिश्तेदारों और जानकारों से हम बहुत सस्ते में जुड़े रह सकते हैं। पढ़ाई-लिखाई के डाक्यूमेंट्स हों या फिर फोटो शेयर करना हो, सबकुछ आसान हो गया है। इसीलिए युवाओं में ये एप काफी पापुलर हैं।
सेक्टर-31 निवासी व्यवसायी नवीन अपने कारोबार के सिलसिले में बाहर जाना पड़ता है। इस दौरान वे अपने परिजनों, साथियों और कारोबारी लोगों से इन एप के जरिए संपर्क करते हैं। फोन पर ही बैठे-बैठे किसी भी सामान के बारे में फोटो मंगाकर जानकारी ले लेते हैं।