गर्भवती को समय पर इलाज नहीं मिलने की जानकारी होने पर तिगांव विधायक ललित नागर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए। अस्पताल में एक चौकीदार के अलावा सिर्फ दो कर्मचारी तैनात मिले।
करीब 25 गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली पीएचसी की एंबुलेंस भी गायब थी। पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा के प्रश्र पर सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा ने छुट्टी पर होने की बात कह पल्ला झाड़ लिया।
नौ में से छह कर्मचारी नदारद
कुछ ही देर में पीएमओ डॉ. राजीव बातिश का फोन विधायक को आ गया। विधायक ने पीएमओ से पीएचसी में तैनात स्टाफ के बारे में पूछा। कुल नौ कर्मचारियों के तैनात होने की जानकारी दी, इनमें से छह ड्यूटी से नदारद थे। विधायक ने पूछा कि क्या पीएचसी में रात के समय डिलीवरी हट बंद कर दी जाती है जिसकी वजह से एक महिला को गेट पर बच्चे को जन्म देने को मजबूर होना पड़ा।
पीएमओ ने मामले की जांच कराने और स्टाफ को हर समय उपलब्ध रहने के निर्देश जारी करने की बात कही। ललित नागर ने लचर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वर्तमान सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार में तिगांव पीएचसी में प्रदेश की पहली मॉडर्न डिलीवरी हट स्थापित की गई थी।
मंत्री के इशारे पर हटाए डॉक्टर
पीएचसी में प्रतिमाह करीब सौ प्रसव कराए जाते थे। आरोप लगाया कि सरकार उनके इलाके में भेदभाव कर रही है, इसी वजह से यहां 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले डॉ. विकास दंपति का तबादला करा दिया गया। केंद्रीय मंत्री पर डॉक्टर दंपति को हटवाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का ढिंढोरा पीटते हैं इसकी सच्चाई सुबह गेट पर प्रसव देने को मजबूर महिला के रूप में सामने आई है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में लचर स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा उठाएंगे। पीएचसी में उनके साथ धर्मबीर मास्टर, राजबीर नागर, सतीश पंडित, युद्धवीर झा, धर्मबीर नागर, बीरु नागर, सुंदर नेताजी, मुकुटपाल, जैना पंडित, अनूप नागर, अनुज नागर, श्यामलाल नागर, मनोज नागर आदि मौजूद रहे।