नाबालिग से वारदात करवाते थे
गिरोह के सदस्य नाबालिगों से चोरियां कराते थे। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह का सरगना गांव में रहने वाले बच्चों के माता-पिता को बहलाता-फुसलाता था और उनसे बच्चों के काम की एवज में 10 से 12 लाख रुपये सालाना देने की पेशकश करता था।
चोरी करना सिखाया जाता था
उपायुक्त गुप्ता ने बताया कि नौ से 15 वर्ष की उम्र वाले इन बच्चों को दिल्ली लाया जाता था और उन्हें बिना किसी की नजर में आये चोरी करना सिखाया जाता था। उन्होंने बताया कि इसके अलावा उन्हें शादी में आये मेहमानों से घुलने-मिलने, गोपनीय तरीके से काम करने और पकड़े जाने पर शांत रहना भी सिखाया जाता था।
सभी मध्य प्रदेश के रहने वाले
उपायुक्त ने बताया कि इंस्पेक्टर दिलीप कुमार को गिरोह की गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी और शास्त्री पार्क मेट्रो डिपो के पास छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया। सभी मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के पास से 2,14,000 रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और चांदी के कई आभूषण बरामद किए हैं।