गुड़गांव पुलिस की तरफ से एक हफ्ते पहले मानव तस्करों से बचाई गई किशोरी को किसी ने दोबारा अगवा कर लिया। जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गई है।
पूरे मामले में महिला वार्डन की भूमिका संदेह के घेरे में आने के बाद पुलिस इसे बड़ी साजिश बता रही है। जिसमें शेल्टर होम की कार्यप्रणाली के आधार पर पुलिस पूरे मामले में कई लोगों के शामिल होने की आशंका जता रहा है।
पुलिस ने महिला वार्डन समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
दिल्ली NCR में बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त
दिल्ली-एनसीआर में नाबालिग बच्चियों की बडे़ पैमाने पर हो रही खरीद फरोख्त के मामले में अमर उजाला की तरफ से चलाई मुहिम के बाद गुड़गांव पुलिस हरकत में आ गई थी।
21 जुलाई को पुलिस ने मानव तस्करों के पूरे गिरोह को गिरफ्तार करते हुए 14 साल की बच्ची उनके चंगुल से छुड़वाया था। पुलिस ने बच्ची को कोर्ट के माध्यम से डीएलएफ फेज दो के ब्लॉक स्थित नारी निकेतन शेल्टर होम में प्रोटेक्शन के लिए भेज दिया था।
लेकिन शनिवार सुबह यहां से संदिग्ध परिस्थितियों में किशोरी गायब हो गई। बताया जा रहा है कि शेल्टर होम से बच्ची के गायब होने के बाद इस मामले को छिपा लिया गया था। लेकिन शाम को पुलिस से मुखबिरों से मिली सूचना के बाद पुलिस ने यहां पहुंचकर जांच की तो पूरा मामला खुल गया।
महिला वार्डन की भूमिका संदेह में
यहां मौजूदा सात बच्चियों में से उसी के गायब होने को लेकर कोई जवाब नहीं दे पा रहा है। इस पूरे मामले में महिला वार्डन की भूमिका संदेह के घेरे में नजर आ रही है। इस मामले को छिपाने के सवाल पर वह कोई जवाब नहीं दे पाई।
पुलिस ने वार्डन प्रमीला समेत अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी। डीएलएफ फेज दो थाने में दर्ज हुए मामले के बाद जांच कर रहे एएसआई तेजपाल के अनुसार आरोपी महिला वार्डन को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है।
पुलिस जांच कर रही है जिसमें जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। साथ ही अब यहां पहले से मौजूद छह बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस के इंतजाम को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
21 जुलाई को हुआ था खुलासा
बच्चियों की तस्करी के मामले में गुड़गांव में हो रही खरीद फरोख्त को लेकर 21 जुलाई को गुड़गांव पुलिस ने मुखबीर की सूचना के आधार पर सुशांतलोक एरिया से 13 वर्षीय बिहार की नाबालिग बच्ची को मानव तस्करों से जाल से निकाला था।
जिसमें दो लाख रुपये में बच्ची को बेचने की साजिश रची गई थी। पुलिस ने दिल्ली में ऑटो चलाने की आड़ में गिरोह चलाने वाले पश्चिम बंगाल निवासी गोविंद दास, रणजीत और मधुबनी बिहार निवासी मिताली नाम की महिला को गिरफ्तार किया था।
इस सौदेबाजी में खरीददार की भूमिका निभाने वाले शख्स को पुलिस ढूंढ रही थी। जिसके बाद कोर्ट ने पीड़िता किशोरी को शेल्टर होम भेज दिया था। तब से उसे नारी निकेतन में प्रोटेक्शन में रखा हुआ था।
नारी निकेतन असुरक्षित
नाबालिगा के गायब होने के बाद नारी निकेतन की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि शेल्टर होम में बच्चियों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया हुआ था।
प्रोटेक्शन में रखी गई सात बच्चियों के लिए एक वार्डन के अलावा दो से तीन हेल्पर ही इनकी देखरेख कर रहे थे। यहां पर सीसीटीवी कैमरा से लेकर गेट पर सुरक्षाकर्मी की भी तैनाती है।
जिससे इस वारदात को आसानी से अंजाम दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश है कि शेल्टर होम में बच्चों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। वारदात के बाद सामने आई सुरक्षा चूक को लेकर पुलिस भी पूरी गंभीरता से ले रही है।
मामले में सुलगते सवाल
सुबह सफाई के दौरान महिला सफाईकर्मी ने मुख्य गेट का दरवाजा खुला क्यों छोड़ा? जबकि गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था?
शेल्टर होम से सुबह बच्ची के गायब होने की जानकारी वार्डन को मिल गई थी इसके बावजूद पुलिस से क्यों छिपाया गया? शेल्टर होम में सुरक्षा इंतजामों को लेकर पुलिस ने पहले दिशानिर्देश क्यों नहीं दिए जबकि इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत है?
डीएलएफ के एसीपी दलबीर सिंह के मुताबिक पूरे मामले में महिला वार्डन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। पुलिस जांच में जुट गई है जिसमें कई और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस जल्द ही वार्डन को गिरफ्तार कर लेगी।