उन्होंने तुरंत बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वहां जाने का आदेश दिया। बच्चियों ने आयोग से अपील की कि उनको वहां से दूसरी जगह न भेजा जाए, क्योंकि उनका स्कूल शेल्टर होम के पास ही है। इसलिए आयोग ने बाल कल्याण समिति से आग्रह किया कि शेल्टर होम के स्टाफ को हटाया जाए। रातभर वहां रुकने के बाद आयोग ने बच्चियों की सुरक्षा के लिए काउंसलर की टीम और सादे कपड़ों में पुलिस के जवान तैनात कराए।
शेल्टर होम में 6 से 15 साल की लड़कियां मौजूद थीं। 22 लड़कियों के लिए एक ही रसोइया है। समिति ने शेल्टर होम में रहने वाली अलग-अलग उम्र की लड़कियों से बात की। बड़ी उम्र की लड़कियों ने बताया कि उनको शेल्टर होम में सारे घरेलू काम करने पड़ते हैं।
स्टाफ की समुचित व्यवस्था न होने की वजह से उन्हें छोटी लड़कियों की देखभाल करनी पड़ती थी। उनसे बर्तन धुलवाए जाते हैं और टॉयलेट भी साफ कराए जाते हैं। इससे इनकार पर उन्हें सजा दी जाती थी। बच्चियों ने बताया कि उन्हें मिलने वाले खाने की गुणवत्ता भी खराब होती है।
बच्चियों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए
नई दिल्ली। महिला आयोग की समिति की शिकायत पर द्वारका सेक्टर 23 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अभी इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने प्रताड़ित लड़कियों के बयान अदालत में दर्ज कराए हैं।