राजधानी दिल्ली में नाबालिग अपराधियों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। हाल ही में जारी हुए आंकडों के अनुसार वर्ष 2013 में नाबालिगों के खिलाफ दर्ज कराए गए मामलों की संख्या 28 फीसदी ज्यादा हो गई है।
2012 में 1541 नाबालिग आरोपियों के खिलाफ 523 आपराधिक मामले दर्ज कराए गए थे जबकि 2013 में यह आंकड़ा 2140 तक पहुंच गया।
एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक दर्ज कराए गए 1590 आपराधिक मामलों में 2140 आरोपी नाबालिग हैं।
रेप के मामलों में भी नाबालिग आरोपी बढ़े
इन सभी पकड़े गए नाबालिगों में से 821 को हायर सेकेंड्री स्कूलों में भर्ती कराया गया और 599 को प्राइमरी स्कूलों में। जबकि 421 अभी भी अनपढ़ हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से 1774 अपने माता-पिता के साथ रहते थे जबकि 69 बच्चे अनाथ थे।
2013 में पकड़े नाबालिगों में से 928 पर चोरी और छिनैती के आरोप थे जबकि 163 पर रेप और 76 पर मर्डर के आरोप थे। अगर साल 2012 के आंकड़ों पर गौर करें तो आपराधिक मामलों में पकड़े गए कुल 1144 नाबालिगों में से 523 पर चोरी, 100 पर मर्डर और 63 पर रेप के आरोप थे।
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वयस्कता की उम्र 16 वर्ष करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। बता दें कि दिसम्बर 2012 में निर्भया गैंगरेप कांड के बाद दिल्ली पुलिस लगातार ये मांग कर रही है।
अभी भी विचाराधीन हैं सैकड़ों मामले
अब तक कई मामलों में पकड़े गए 2140 नाबालिगों में से 2087 को मामूली अपराधों में गिरफ्तार किया गया था। जिनमें से 697 को चेतावनी और सलाह देकर घर भेज दिया गया, जबकि 301 आरोपियों को निगरानी में रखने के बाद छोड़ा गया।
गिरफ्तार आरोपियों में से 692 को बाल सुधार गृह भेज दिया गया और 17 से जुर्माना लिया गया। यही नहीं 149 आरोपियों को यूं ही रिहा कर दिया गया। इसके बावजूद नाबालिग अपराधियों के 267 मामले अभी भी विचाराधीन हैं।
2013 में आए मामलों में सबसे ज्यादा नाबालिग चोरी के केस में नामजद किए गए। जबकि 2012 में सबसे ज्यादा नाबालिग रेप के मामलों में आरोपी बनाए गए थे।
इसके पीछे क्या है वजह?
जानकारी के अनुसार, आपराधिक मामलों में पकड़े गए नाबालिगों में से 1148 की उम्र 16 से 18 साल के बीच थी। जबकि 2012 में ये आंकड़ा 860 था।
नाबालिगों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से मांग की है कि बाल सुधार गृहों में ऐसे मजबूत और असरदार प्रोग्राम शुरू किए जाएं ताकि नाबालिग, आपराधिक गतिविधियों से दूर रहें।
साल की शुरूआत में दिल्ली पुलिस की ओर से आयोजित एक प्रोग्राम में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रधान जज सुची ललेर ने काउंसलरों से यह सवाल किया था कि नाबालिगों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति के पीछे क्या कारण हैं? साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि बच्चों के माता-पिता को भी उचित सीख दी जाए ताकि बच्चे अपराध से दूर रहें।