‘आप’ के मंत्री सरकारी बंगला नहीं लेंगे तो लोक निर्माण विभाग के करोड़ों की लागत से बने आधा दर्जन बंगले खाली रहेंगे। राजनिवास मार्ग और अताउर रहमान लेन पर करीब एक वर्ष पूर्व छह बंगले बनाए गए थे।
अभी राजनिवास मार्ग पर बना बंगला नंबर एक कांग्रेस के मुख्य सचेतक कंवर करण सिंह के नाम आवंटित है। वहीं शीला दीक्षित, हारून यूसुफ और अरविंदर सिंह लवली सीपीडब्ल्यूडी के बंगलों में रहते हैं। किरण वालिया और रमाकांत गोस्वामी एनडीएमसी के सत्य सदन के बंगलों में रहते हैं।
मुख्यमंत्री को सीपीडब्ल्यूडी के टाइप-एक का बंगला मिल सकता है जबकि मंत्रियों को टाइप-बी बंगला दिया जा सकता है। जबकि पीडब्ल्यूडी के मैन्युअल में अधिकारियों के लिए सबसे अच्छी क्वालिटी का बंगला टाइप-7 होता है।
ऐसे में मंत्रियों के लिए विशेष तौर पर तैयार आधा दर्जन बंगलों का क्या होगा, यह तय नहीं है। चुनाव से पूर्व बनकर तैयार बंगलों का आवंटन मंत्रियों ने इसलिए नहीं कराया था क्योंकि विधानसभा क्षेत्र से दूर हो जाते।
दिल्ली विधानसभा शामनाथ मार्ग पर स्थित है। सिविल लाइंस में ही राजनिवास मार्ग है। यह उपराज्यपाल का निवास है। मंडलायुक्त दफ्तर, श्रम विभाग आयुक्त का दफ्तर भी उसी सड़क पर है।
इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस मुख्यालय, पीडब्ल्यूडी मुख्यालय, आबकारी विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग, अल्पसंख्यक आयोग, महिला आयोग के अलावा दिल्ली सचिवालय भी यहां से नजदीक है।
ऐसे में मंत्री राजनिवास मार्ग और अताउर रहमान लेन के बंगलों में रहते हैं तो अधिकारियों को बैठक में पहुंचने में आसानी होगी। इतना ही नहीं जनता भी आसानी से पहुंच सकेगी।
दिल्ली सरकार के मंत्रियों को बंगला आवंटित किए जाने के अलावा कैंप ऑफिस के लिए सुविधाएं दी जाती हैं। नौकर-चाकर, फर्नीचर, सुरक्षा मिलती है। निजी मकान में रहने पर भी कैंप ऑफिस की सुविधा दी जा सकती है।
चौथी विधानसभा की सरकार की बात करें तो विधानसभा अध्यक्ष डा. योगानंद शास्त्री, मंत्री राजकुमार चौहान और डॉ. अशोक कुमार वालिया निजी आवास में रहते हैं।