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जीडीए की फर्जी ईमेल बनाकर लाखों की ठगी

Tue, 17 Mar 2015 12:18 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स में ईडब्लूएस-एलआईजी फ्लैट्स में आवेदन और आवंटन कराने के नाम पर खाने की ठेली लगाने वालों से लाखों रुपये की ठगी कर ली गई।
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शातिर ने अंतिम डेट खत्म होने के बाद योजना में आवेदन कराने के नाम पर एक दर्जन से अधिक ठेली संचालकों से 30-30 हजार रुपये हड़प लिए।

जीडीए की फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर आवेदन किया जाना भी दिखा दिया। ठेली संचालक जीडीए से आवेदन कंफर्म कराने पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन निकल गई।

जीडीए वीसी ने तत्काल गोविंदपुरम स्थित शातिर केघर पुलिस भेजकर उसे गिरफ्तार करा दिया। देर रात आरोपी के खिलाफ कविनगर थाने में धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।

मामले के मुताबिक गोविंदपुरम के सी ब्लॉक में कई दुकानदार खाने की ठेली लगाते हैं। यहां शताब्दी नगर, गोविंदपुरम में रहने वाला प्रेम चौधरी उर्फ प्रेम शंकर नामक युवक तीन-चार साथियों संग खाना खाने आता था।
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इस युवक ने ठेली संचालकों को जीडीए अधिकारियों से अपने बेहतर संबंध बताते हुए विभिन्न योजनाओं में खाली मकान दिलाने की बात कही।

आरोपी ने कहा कि बिल्डर प्रोजेक्ट में सस्ते ईडब्लूएस और एलआईजी स्कीम में आवेदन की अंतिम डेट 31 दिसंबर 14 खत्म हो गई है।

वह जीडीए अधिकारियों से सेटिंग कर इन फ्लैट्स में आवेदन करा देगा। ग्राउंड फ्लोर के मकान के लिए डेढ़ लाख रुपये अधिक देने होंगे।

इस योजना में ईडब्लूएस के लिए 10,050 रुपये और एलआईजी के लिए 20,050 रुपये आवेदन फीस थी। आरोपी ने 12 लोगों में कुछ से 50,050 और कुछ से 30,050 रुपये ले लिए।

एक व्यक्ति से 10 हजार का बैक ड्राफ्ट लिया। जीडीए की फर्जी आईडी पर आवेदन होना भी दिखा दिया।

कविनगर थानाध्यक्ष अवनीश गौतम ने बताया कि आरोपी प्रेम चौधरी से बरामद वोटर आईडी कार्ड में वह धनौरा कालोनी, गजरौला का मूल निवासी है। यहां गोविंदपुरम में ताऊ के मकान में रह रहा था।

उसके साथ आने वाले साथी इनमें शामिल हैं या नहीं? सामने आए पीड़ितों के अलावा कितनों को ठगा गया है? इसकी पूछताछ की जा रही है। पीड़ित विपिन चड्ढा की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

फर्जी ई-मेल से चला रहा था पैरलल जीडीए
जीडीए ओएसडी डीपी सिंह ने बताया कि आरोपी ने जीडीए-1 एट द रेट जीमेल डॉट कॉम और इंफोजीडीए एट द रेट जीमेल डॉट कॉम के नाम से ईमेल आईडी बनाईं थीं।

इसी मेल आईडी के जरिए आवेदन फार्म दिखाए जाते थे। कंप्यूटर के जरिए फर्जी तरीके से बनाए गए आवेदन फार्म लोगों को दिए गए थे।

जीडीए पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि दो आरोपियों ने योजना के 22 फ्लैट अपने पास होने का दावा किया था। सुरेंद्र नामक एक आरोपी फरार बताया गया है।

पकड़े गए आरोपी ने खुद को राजनगर एक्सटेंशन की क्लासिक रेजीडेंसी का कर्मचारी बताया। आरोपियों के पास से डीएमआरसी, इलाहाबाद भर्ती बोर्ड समेत कई अन्य सरकारी विभागों के प्रपत्रों की कॉपी भी मिली हैं।
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इससे बड़े फर्जीवाड़े की संभावना भी है। इसका सुरेंद्र नामक साथी फरार बताया जा रहा है।

सुरेंद्र का नंबर पकड़े गए आरोपी के पास
सुरेंद्र का बताया गया मोबाइल नंबर का सिम भी पकड़े गए आरोपी के मोबाइल में ही लगा मिला। इससे घटना में शामिल लोगों की संख्या की गुत्थी उलझ गई है। आरोपी के सही नाम पर भी संशय है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के बाद ही सच्चाई पता चलेगी।

विश्वास जीतकर दिया धोखा
पीड़ितों ने बताया कि आरोपी कई बार अपने माता-पिता को उनके ठेले और घरों में लेकर आया। माता-पिता के जरिए उसने लोगों का विश्वास जीता।

पीड़ितों ने पुलिस से आशंका जताई है कि वह मां-बाप भी नकली हो सकते हैं। इस पर पुलिस ने गजरौला में आरोपी के अभिभावकों को मैसेज कर दिया है।
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