शहीद स्थल मेट्रो स्टेशन पर पहले दिन टोकन काउंटर बंद रहा। यात्रियों की सुविधाओं के लिए सात टोकन मशीनें लगाई गई थीं। मशीन के पास मेट्रो कारपोरेशन के दो कर्मचारी तैनात थे। ये कर्मचारी समस्या आने पर उसका समाधान कर रहे थे। हर मशीन के आगे यात्रियों की लंबी लाइन लगी हुई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे-वैसे यात्रियों की संख्या बढ़ती गई।
आठ यात्रियों ने बनवाया स्मार्ट कार्ड
मेट्रो स्टेशन पर ग्राहक सेवा केंद्र पर स्मार्ट कार्ड बनाने में तकनीकी दिक्कत आई। यात्री काउंटर के बाहर खड़े रहे। मेट्रो कर्मचारी तकनीकी दिक्कत को ठीक कर रहे थे। वहीं केंद्र पर चेंज पैसे को लेकर भी यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई यात्रियों को कार्ड होने के बावजूद वापस टोकन लेने के लिए जाना पड़ा। पहली मेट्रो के लिए आठ यात्रियों ने स्मार्ट कार्ड बनवाया। 150 रुपये में स्मार्ट कार्ड बना।
सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
शहीद स्थल मेट्रो स्टेशन में सीआईएसएफ ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। उत्सुकता में अनेक लोग मेट्रो के शुरू होने से पहले ही आकर खड़े हो गए थे, पर उन्हें स्टेशन के अंदर आने नहीं दिया गया। स्टेशन का मेन एंट्री प्वाइंट का शटर गिरा हुआ था। मेट्रो कर्मचारी अंदर सफाई कार्य में लगे हुए थे। वहीं मेट्रो का ऑपरेशनल स्टाफ भी कंट्रोल रूम में आकर तैनात हो गया था।
मशीन के बाहर जाने के प्वाइंट थे खराब
मेट्रो स्टेशन के अंदर और बाहर जाने के लिए मशीन से गुजरना पड़ता है। पहले दिन बाहर जाने मशीन को ओपन होने में तकनीकी दिक्कतें आई। यात्रियों ने टोकन और कार्ड लगाया फिर भी मशीन ओपन नहीं हुई। कर्मचारियों ने दूसरी मशीन में टोकन दिखाकर यात्रियों को बाहर निकाला गया।
स्टेशन पहुंचने/चलने का वक्त
दिलशाद गार्डन 8:28 बजे
शहीद नगर 8:30 बजे
राजबाग 8:32 बजे
मेजर मोहित शर्मा 8:34 बजे
श्याम पार्क स्टेशन 8:36 बजे
मोहननगर 8:38 बजे
अर्थला 8:40 बजे
हिंडन रिवर 8:42 बजे
शहीद स्थल 8:45 बजे
अनिल मारवा ने लिया पहला स्मार्ट कार्ड
दिल्ली-एनसीआर में कोई भी मेट्रो लाइन शुरू होती है तो उसका पहला स्मार्ट कार्ड अनिल मारवा लेते हैं। वसंत कुंज निवासी अनिल मारवा अपने बेटे अक्षत मारवा के साथ सुबह 8 बजे से पहले नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन पहुंचे। अनिल ने बताया कि उनका यह शौक अब जुनून बन गया है। कार्ड लेने की शुरुआत 25 दिसंबर 2002 में शुरू की थी। तब शाहदरा से तीस हजारी मेट्रो लाइन का स्मार्ट कार्ड लिया था। तब से अब तक जितनी मेट्रो लाइन शुरू हुई है, उन सभी का पहला मेट्रो स्मार्ट कार्ड खरीदा है। अभी तक उनके पास 35 कार्ड हो चुके हैं। उनके इसी शौक की वजह से 2019 में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
फैमिली से बातचीत
- पहली मेट्रो में बैठने के लिए अजय शर्मा और उनके दोनों बच्चे शौर्य शर्मा और रीवा शर्मा बड़े ही उत्साहित थे। अजय ने बताया कि मेट्रो कब चलेगी उसका सही समय पता नहीं था। इसलिए सुबह सात बजे ही आकर मेट्रो स्टेशन पहुंच गए थे। यहां आकर पता चला कि मेट्रो आठ बजे चलेगी। इसलिए इंतजार किया और फिर मेट्रो पकड़कर दिलशाद गार्डन तक गए और वहां नाश्ता करके वापस शहीद स्थल आ गए।
- साहिबाबाद से शहीद स्थल तक मेट्रो में घूमने निकले विनोद धुहून व उनकी पत्नी डॉ. प्रीति ने बताया कि न्यूज में पढ़ने के बाद इस रूट की मेट्रो के शुरू होने का पता चला। इसलिए सिर्फ एंजॉयमेंट के लिए ही मेट्रो में घूमने के लिए निकले हैं। मेट्रो के शुरू होने से लाखों लोगों को फायदा मिलेगा।
- शकूरपुर दिल्ली से गोशाला अपने रिश्तेदारी में आए इस्माइल अली ने बताया कि पहले गौशाला तक पहुंचने में एक घंटे से ज्यादा समय लगता था। शकूरपुर से दिलशाद गार्डन तक मेट्रो से आते, फिर ऑटो या बस से जस्सीपुरा मोड़ तक पहुंचते। वहां से दूसरा ऑटो लेना पड़ता। बार-बार ऑटो बदलने से दिक्कत भी होती। अब ये परेशानी नहीं होगी। घर से शहीद स्थल (नया बस अड्डा) तक मेट्रो से आएंगे। फिर ऑटो लेकर सीधे घर जाना पड़ेगा। इससे समय बचेगा।