जिला अस्पताल में नवजात के जन्म पर सबसे पहले उसकी शारीरिक और मानसिक जांच की जाएगी। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसका इलाज कराया जाएगा। इसके बाद ही नवजात को डिस्चार्ज किया जाएगा। इसके लिए जिला अस्पताल में डीईआईसी सेंटर खोला गया है। इस सेंटर में निजी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों की भी जांच निशुल्क की जाएगी।
सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से अधिक नवजात शिशु जन्म लेते हैं। मां और बच्चे को 24 घंटे में ही अस्पताल से घर भेज दिया जाता है। बच्चों की ठीक से जांच नहीं की जाती। इस वजह से अक्सर माता पिता, बच्चे में कई तरह की बीमारियों की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। इस प्रकार की दिक्कतों का समाधान करने के लिए जिला अस्पताल में डीईआईसी सेंटर खोला गया है।
बच्चे के जन्म लेते ही उसकी इस सेंटर में मानसिक और शारीरिक जांच की जाएगी। बच्चे में किसी भी प्रकार की कमी होने पर उसे तुरंत उपचार दिया जा सकेगा। माना जाता है कि अक्सर बच्चे में वजन कम होने से लेकर नाक, कान, गले, आंख, कुपोषण के अलावा मेंटल ग्रोथ संबंधी समस्याएं होती हैं। इनका तुरंत इलाज बेहद जरूरी है। इलाज में देरी होने पर यह जन्मजात बीमारी बन जाती है।
चिकित्सकों की मानें तो समय पर इलाज मिलने से इस तरह की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। जिला अस्पताल में खोले गए डीईआईसी सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बैठेगी जो बच्चे की पूरी पड़ताल करेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग भार्गव ने बताया कि इस सेंटर में बाहरी अस्पताल, नर्सिंग होम आदि में जन्म लेने वाले बच्चों की भी निशुल्क जांच की जाएगी।