दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने केंद्र सरकार के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें क्लब को 5 जून तक परिसर खाली कर जमीन सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। मामले को लेकर सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति अवनीश झिंगान की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की मांग की। याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि यदि भविष्य में क्लब परिसर से बेदखली की कोई कार्रवाई की जाती है तो वह पूरी कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस देने के बाद ही की जाएगी। हाईकोर्ट ने ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए फिलहाल किसी भी अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया। साथ ही मामले को आगे की प्रक्रिया के लिए संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पट्टे की वैधता, सार्वजनिक उद्देश्य और अन्य कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी। पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सार्वजनिक परिसर कानून के तहत कोई कार्रवाई होती है तो संबंधित पक्ष उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हाईकोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस, आठ हफ्ते में जवाब
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी याचिककर्ता विजय खुराना की तरफ पेश हुए वहीं, सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार का पक्ष रखा। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुना गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने केंद्र को आठ हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
'जिमखाना क्लब की जगह पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेगी सरकार'
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार दिल्ली जिमखाना क्लब की जगह पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेगी। अगर क्लब 5 जून तक जमीन खाली नहीं करता है, तो वह कानून के तहत सही प्रक्रिया का पालन करेगी।
तत्काल बेदखली नहीं...स्थायी पट्टा व्यवस्था समाप्त करने से जुड़ा था आदेश : मेहता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, 'ऐसा नहीं होगा कि पुलिस तुरंत अंदर घुस जाएगी और जबरदस्ती कब्जा कर लेगी। सार्वजनिक जगहों से बेदखली के संबंध में कानून के तहत जो प्रक्रिया तय है, उसी का पालन किया जाएगा।' तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 22 मई को जारी पत्र केवल क्लब की स्थायी पट्टा व्यवस्था समाप्त करने और जमीन पर दोबारा अधिकार लेने से जुड़ा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई तत्काल बेदखली आदेश नहीं था।
केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर सरकार दोबारा कब्जा नहीं ले सकती :सिंघवी
क्लब के सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में तर्क दिया कि स्थायी पट्टा लगभग स्वामित्व के समान होता है और केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर सरकार दोबारा कब्जा नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी कहा कि बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के किसी संस्था या व्यक्ति को बेदखल नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार की कार्रवाई को संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले से जुड़ा है। याचिका क्लब के सदस्यों, कर्मचारियों के कल्याण संघ और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से दायर की गई है। विवाद की शुरुआत 22 मई को जारी उस पत्र से हुई, जिसमें क्लब को 5 जून तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था। केंद्र का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक है। यह भूमि वर्ष 1928 में स्थायी पट्टे पर क्लब को दी गई थी।
केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जिमखाना क्लब को 27.3 एकड़ भूमि निर्धारित समय सीमा के भीतर खाली करने का आदेश दिया है। भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सरकार के अनुसार, इस भूमि की जरूरत रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए है। क्लब सदस्यों का कहना है कि यह आदेश उचित नहीं है और इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।