कब शुरू हुआ विवाद
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब भूमि और विकास कार्यालय ने 22 मई को एक आदेश जारी कर इस औपनिवेशिक काल के क्लब को 5 जून तक अपनी भूमि वापस करने का निर्देश दिया था। सरकार ने इसके पीछे 'रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने' का हवाला दिया था। इसके बाद, 29 जून को भूमि और विकास कार्यालय ने क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए।
'रक्षा सुरक्षा' का हवाला सिर्फ एक बहाना: क्लब सदस्य
क्लब के सदस्य विजय खुराना और 'दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन' द्वारा दायर इन याचिकाओं में केंद्र के इस कदम को चुनौती दी गई है। विजय खुराना की इस याचिका को क्लब के 500 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार द्वारा रक्षा बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के नाम पर दिए गए कारण 'अस्पष्ट और सामान्य' हैं और यह सिर्फ एक 'दिखावा' है।
ये जबरन बेदखली का प्रयास
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय 'जबरन बेदखली का एक प्रयास' है। गौरतलब है कि इससे पहले 26 मई को केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह 5 जून तक 27.3 एकड़ के इस परिसर का जबरन कब्जा नहीं लेगी।
6 जुलाई पर टिकी सबकी निगाहें
अब, संपदा अधिकारी बिपिन कुमार सिंह द्वारा जारी नए नोटिस के अनुसार, क्लब और इससे जुड़े संबंधित व्यक्तियों को 7 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने और अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इससे ठीक पहले, 6 जुलाई को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।