दिल्ली पुलिस की लेडी सिंघम, 13 लाख छात्रों सिखाए आत्मरक्षा के गुर नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात किरण सेठी के प्रयासों ने लाखों लड़कियों का जीवन बदला है। वह अब तक करीब 13 लाख छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखा चुकी हैं। करीब 35 साल से जूडो-कराटे और ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट किरण सेठी फिलहाल दिल्ली के रेड लाइट एरिया की महिला पुलिस चौकी इंचार्ज हैं। यहां वह गरीब बच्चों के साथ सेक्स वर्कर के बच्चों को पढ़ाने से लेकर उनको प्रोफेशनल कोर्स की ट्रेनिंग भी दे रही हैं। यही नहीं, कई सेक्स वर्कर को इन्होंने समाज की मुख्य धारा से जुड़ने में भी मदद की हैं। दर्जनों अवार्ड जीतने वाली किरण का नाम 2015 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ। इसके अलावा पुलिस पदक, अभय अवार्ड, दिल्ली पुलिस का असाधारण कार्य पुस्कार, आई-वूमेन ग्लोबल अवार्ड समेत कई नामी अवार्ड उनके नाम हैं। दो बार वह गणतंत्र दिवस परेड में राइट गाइड बनकर शामिल हुई हैं।
मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली किरण सेठी की स्कूली पढ़ाई राजेंद्र नगर सरकारी स्कूलों से हुई। इसके बाद डीयू के जीसस एंड मैरी कॉलेज में दाखिला लेने के बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पांच विषयों में पीजी करने के अलावा किरण ने लॉ भी किया है। किरण किक बॉक्सिंग भी खिलाड़ी रही हैं। वर्ष 2000 में उन्होंने जर्मनी में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था। किरण छात्रों के अलावा लगातार दिल्ली पुलिस के जवानों को भी ट्रेनिंग देने वाली दिल्ली पुलिस की पहली महिला हैं। किरण बताती हैं कि फोर्स से भले ही वह रिटायर हो जाएं, लेकिन अंतिम सांस तक वह समाज के लिए कुछ न कुछ करती रहेंगी।
दिव्यांगता से लकड़ी का खोखा फिर अपने हुनर से अंतरराष्ट्रीय मुकाम तक पहुंचने की कहानी
दो साल की उम्र में पोलियो से दिव्यांग की छाप मिलने के साथ ही 42 वर्षीय आरती रोहिल्ला के संघर्षों का सिलसिला शुरू हो गया। ऐसे में बचपन में ही पोलियो होने के कारण वे व्हीलचेयर पर हैं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने शोक को ही इतना मंझा की उसे हुनर में तब्दील कर दिया। वह क्रोशिया सुई और धागे या ऊन की मदद से की जाने वाली एक हस्तकला में राष्ट्रीय विजेता है। लेकिन किस्मत की मार के कारण फिलहाल वह 89 प्रतिशत दिव्यांगता होने के बावजूद पुष्प विहार सेक्टर एक में अपने छोटी से लकड़ी के खोखे में हुनर के बलबूते पर अपना घर चला रही है। उनके पति की 2023 में मृत्यु हो गई और अपने 14 साल के बेटे को अकेले पाल रही है। ऐसे में किसी की आर्थिक सहायता से उन्होंने खोखे की शुरुआत की। आरती ने 2009 में अमर ज्योति स्कूल की तरफ से आयोजित क्षेत्रीय अबिलंपिक्स में गोल्ड मेडल और 2010 में जबलपुर में राष्ट्रीय ओलिंपिक्स में भी गोल्ड मेडल हासिल किया। अब 2025 में सरथक एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय अबिलंपिक्स और दिल्ली में राष्ट्रीय अबिलंपिक्स में क्रोशे स्पर्धा में फिर से गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की। इसके बाद 2027 में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगी। वे क्रोशे को अपना शौक और रोजगार दोनों मानती हैं। एक संगठन ने उन्हें चाय की दुकान शुरू करने में मदद की, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं। इसके अलावा जनवरी 2025 में एक संगठन ने उन्हें बहादुर रानी लक्ष्मी बाई के खिताब से सम्मानित किया।