मेरठ मेडिकल कॉलेज और दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने मानसिक तौर पर अक्षम रोगी को भर्ती करने से मना कर दिया। रोगी जिला अस्पताल से रेफर की गई थी। रोगी का मानसिक इलाज कैसे हो, अस्पताल प्रशासन इसे लेकर परेशान है। इमरजेंसी डॉक्टर अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि करीब पांच दिन पहले 108 नंबर एंबुलेंस दनकौर से महिला को जिला अस्पताल लेकर आई थी।
महिला के पैर में फ्रैक्चर था और दनकौर स्वास्थ्य केंद्र में उसका प्लास्टर तक नहीं किया गया था। महिला के पैर में कच्चा प्लास्टर करने के बाद मानसिक इलाज के लिए उसे दिल्ली के सरकारी अस्पताल भेजा गया था, जहां उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन वहां से भी डॉक्टरों ने उसे लौटा दिया।
बृहस्पतिवार को महिला के पैर का पक्का प्लास्टर किया गया है। सीएमएस डॉ. नागेंद्र मोहन माथुर का कहना है कि अस्पताल में मानसिक रोगियों के इलाज की व्यवस्था नहीं है और उसे कोई सरकारी अस्पताल लेने को तैयार नहीं हैं।
ऐसे में उसके इलाज की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती यह महिला अपना नाम बेला बता रही है। उसका कहना है कि भीख मांगकर वह गुजारा करती है। उसका कोई नहीं है।