वर्ष 2016 में मेरठ में दो महिलाओं पर हुए एसिड अटैक मामले के मुख्य आरोपी को जमानत पर रिहा करने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। वहीं इस मामले के एक अन्य आरोपी को मिली जमानत पर शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि 11 अप्रैल के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर अगर एसिड अटैक के मुख्य आरोपी अब्दुल कादिर को रिहा नहीं किया गया है, तो उस पर रोक लगाई जाए।
पीठ ने इस फैसले पर आश्चर्य जताया कि इतने गंभीर मामले में आखिर आरोपी को जमानत कैसे मिल गई। साथ ही पीठ ने गत वर्ष 10 फरवरी को हाईकोर्ट से सह आरोपी आतिक को जमानत मिलने पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। पीठ ने आतिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पीड़ित परिवार ने 11 अप्रैल के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वकील शादान फरासत के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट द्वारा मुख्य आरोपी को जमानत देने का फैसला गलत है।
वकील ने कहा कि इससे न केवल सबूत नष्ट होने की आशंका है, बल्कि पीड़ित परिवार की जान को भी खतरा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन सिर्फ 18 महीने जेल में रहने के बाद मुख्य आरोपी को जमानत दे दी गई। उन्होंने हाईकोर्ट का फैसला निरस्त करने की गुहार लगाई है।
क्या है मामला
जून 28, 2016 की रात आरोपियों ने घर में सो रही एक युवती और उसकी भाभी पर एसिड फेंक दिया। इस हमले से युवती के चेहरे, छाती, बांह सहित शरीर के कई हिस्से बुरी तरह झुलस गए। बाईं आंख की सर्जरी करवानी पड़ी।
वहीं उसकी भाभी की छाती और बांह जल गए। पुलिस के मुताबिक, एक आरोपी का उस युवती की भाभी के साथ अवैध संबंध था। इस बात की भनक युवती और उसकी एक अन्य भाभी को लग गई थी। इस बात से नाराज आरोपी ने कुछ साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। इस मामले में कुल चार आरोपी हैं।