आनंद पर्वत में मीनाक्षी की हत्या पर दिल्ली सरकार के दबाव से उबरने के बाद दिल्ली पुलिस आक्रामक हो गई है। आनंद पर्वत इलाके के लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास जगाने के लिए रविवार शाम मध्य परिक्षेत्र के तमाम पुलिस अधिकारी ने वहां का दौरा किया।
संयुक्त आयुक्त से लेकर सिपाही तक इलाके के लोगों के मिले और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने कई लोगों के समस्या का समाधान भी किया।
मध्य परिक्षेत्र के संयुक्त आयुक्त एस के गौतम ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह अपील करना चाहते हैं कि कुछ लोगों द्वारा आनंद पर्वत की घटना को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।
पुलिस के खिलाफ हुआ झूठा प्रचार
पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और गिरफ्तारियां कीं। इस मामले की जांच की जा रही है। एस के गौतम ने कहा कि मीडिया में विज्ञापन के जरिए मीनाक्षी मामले में दिल्ली पुलिस के खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है।
टीवी चैनलों पर लगातार मीनाक्षी को 32 चाकू मारे जाने का विज्ञापन चल रहा है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मीनाक्षी के शरीर पर चाकू के आठ जख्म थे।
साथ ही यह अफवाह भी उड़ाई जा रही है कि दो साल से लड़की छेड़खानी की शिकायत कर रही थी। जबकि सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने पिछले सात साल के पीसीआर कॉल के रिकॉर्ड निकाले हैं।
जिसमें ज्यादातर कॉल पानी बिजली, बच्चों में कहासुनी या फिर मामूली बात पर झगड़े की शिकायतें हैं। उन्होंने बताया कि लड़की की मां ने एक बार शिकायत की थी।
आनंद पर्वत से बाहर के थे प्रदर्शनकारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मीनाक्षी की हत्या के बाद 19 जुलाई को लोगों ने पुलिस मुख्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दिया था।
प्रदर्शन करने वाले 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें से सिर्फ एक आनंद पर्वत का रहने वाला था। वहीं 21 जुलाई को लोगों ने आनंद पर्वत थाने पर प्रदर्शन किया।
कहा गया कि आनंद पर्वत के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इस मामले में जिन 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उसमें से 2 लोग ही आनंद पर्वत के रहने वाले थे।