उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना की तरफ से दायर मानहानि के एक मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा। निचली
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना की तरफ से दायर मानहानि के एक मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा। निचली अदालत के आदेश के खिलाफ पाटकर ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
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न्यायमूर्ति शालिंदर कौर ने कहा कि अध्ययन के बाद हाईकोर्ट को निचली अदालत के आदेश में कोई अवैधता नहीं मिली और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है। सक्सेना ने यह मामला 23 साल पहले दायर किया था जब वह गुजरात में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमुख थे।