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Fraud : राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी, टेंडर दिलाने के नाम पर होता रहा गोरखधंधा

Wed, 30 Jul 2025 01:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

इस मामले में मंत्रालय के कर्मचारी की भूमिका की भी पुलिस जांच कर रही है। कर्मचारी पर करोड़ों का टेंडर दिलवाने के नाम पर आरोपियों और कारोबारियों के बीच लेनदेन कराने का आरोप है।
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Demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन की फर्जी वेबसाइट बना टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले दो आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों ने अलग-अलग जगहों पर कार्यालय खोला और वहीं टेंडर दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया।

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इस मामले में मंत्रालय के कर्मचारी की भूमिका की भी पुलिस जांच कर रही है। कर्मचारी पर करोड़ों का टेंडर दिलवाने के नाम पर आरोपियों और कारोबारियों के बीच लेनदेन कराने का आरोप है। पुलिस दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इनसे शिकायतकर्ता की ओर से आपूर्ति की गई करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की 45 हजार वर्दी से भरे दो ट्रक जब्त किए गए हैं।

आरोपियों की पहचान करुणाकर उर्फ रत्नाकर उपाध्याय और अनीता उपाध्याय के रूप में हुई है। शाखा की अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमृता गुगुलोथ ने बताया कि 22 मई को कैप्टन शिवेंद्र सिंह बख्शी, एम के राजेंद्रन और ई कृष्णा राव सहित कुछ अन्य शिकायतकर्ता ने शाखा में ठगी की शिकायत की।
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आरोप लगाया कि आरोपी अनीता उपाध्याय और अन्य ने विभिन्न राज्यों में समाज के वंचित वर्ग के छात्रों को सरकारी मदद की आपूर्ति के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन के तहत करोड़ों का टेंडर दिलाने की बात कही गई। साथ ही बताया कि इसके तहत स्कूल ड्रेस, बैग, मेडिकल किट व स्टेशनरी सहित कई सामानों की आपूर्ति करनी है। आरोपियों ने झांसा दिया कि मोटा मुनाफा होगा। इसके बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं से निविदा आवंटित कराने के लिए बतौर कमीशन करोड़ों रुपये ले लिए।

शाखा ने शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया। मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी रत्नाकर उपाध्याय ने राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन (आरजीएसएम) के डोमेन नाम से एक फर्जी वेबसाइट बनाई और आरोपी अनीता ने आरजीएसएम के नाम से एक बैंक खाता खोला हुआ है।

शिकायतकर्ता पक्ष के खाते से इस खाते में रकम को ट्रांसफर किया गया। आरोपी रत्नाकर उपाध्याय ने इस खाते से 3.5 करोड़ रुपये की बड़ी रकम निकाली और निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया। आरोपी अनीता उपाध्याय ट्रस्ट आरजीएसएम की प्रमुख थी। उसे भी आरजीएसएम के खाते से राशि का लाभार्थी पाया गया। साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

छत्तीसगढ़ में भी हो चुके है गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरजीएसएम के लिए आपूर्ति से संबंधित इसी तरह के फर्जीवाड़ा के मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस मामले की जांच भी अभी जारी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी करुणाकर उर्फ रत्नाकर उपाध्याय ने कला में स्नातक किया है। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में कई आपराधिक मामलों में शामिल होने का आरोप है।

इसमें से दिल्ली में दुष्कर्म का एक मामला भी शामिल है। वहीं आरोपी अनीता उपाध्याय ने विज्ञान में स्नातक किया है और कथित ट्रस्ट आरजीएसएम की प्रमुख है। इसे भी छत्तीसगढ़ पुलिस ने इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों बेरोजगार थे और आसानी से कमाई करने के लिए आरोपियों ने ठगी शुरू कर दी।
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