मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभागों का डंडा अवैध मीट की दुकानों व बूचड़खानों पर चलना शुरू हो चुका है। शहर के अधिकांश अवैध दुकान बंद कर दिए गए हैं। जबकि, कुछ वैध दुकानों पर ही चिकन और मीट मिल रहा है।
इन्होंने मौके का फायदा उठाते हुए रातोंरात दामों में 50 से 60 रुपये तक का इजाफा कर दिया है। ऐसे में मीट व चिकन का स्वाद लेने वालों की जेब ढीली होने लगी है। हालांकि, दूर-दूर से लोग यहां चिकन और मीट लेने पहुंच रहे हैं।
शहर में अवैध मीट की दुकानों को बंद करने व सर्वे के लिए 10 टीमें काम कर रही हैं। सर्वे के अनुसार, यहां करीब 90 प्रतिशत मीट की दुकानें व ज्यादातर बूचड़खाने अवैध हैं। इसको लेकर शनिवार व रविवार को बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया।
कई अवैध दुकानों को बंद किया गया। कुछ लोगों ने डर के चलते भी अपनी दुकानों के शटर बंद कर दिए। सिटी मजिस्ट्रेट रामानुज ने बताया कि दो दिनों में शहर की अवैध मीट की दुकानों को बंद कर दिया गया है। जिनके पास लाइसेंस है, पर मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं तो उन पर कार्रवाई की जा रही है।
दुकान के बाहर लगाया लाइसेंस
सेक्टर-27 में मीट की दुकान चला रहे शौकत ने बताया कि दुकान के बाहर लेमिनेशन कराकर लाइसेंस लटका दिया है, जिसका फायदा मिल रहा है। बड़ी दूर-दूर से लोग मीट लेने आ रहे हैं। इसकी वजह अवैध दुकानों का बंद किया जाना है। हालांकि, उनका कहना है कि गत एक सप्ताह से काफी दिक्कत हो रही है।
200 तक चिकन और 450 तक बिक रहा मीट
जो मीट शॉप खुले हैं उनके मालिक विभाग की कार्रवाई पूरा फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने अचानक दामों में इजाफा कर दिया है। मसलन, जो चिकन बाजारों में 160 रुपये किलो बिक रहा था, वह 200 रुपये किलो व मीट 400 के स्थान पर 450 व 460 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
शहर में मुख्यमंत्री के फैसले का विरोध नहीं
शहर में मुख्यमंत्री के इस फैसले का विरोध नजर आता नहीं दिख रहा है। प्रदेश में कई शहरों में सोमवार को फैसले को लेकर मीट कारोबारियों ने हड़ताल की है। बता दें कि विभागीय आदेशों में स्पष्ट है कि सिर्फ उन्हीं बूचड़खानों व दुकानों को बंद किया जाएगा, जो अवैध रूप से चल रही हैं। ऐसे में जिन दुकानदारों के लाइसेंस हैं, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा।