हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर आखिरकार एमसीडी ने सदन से चुने गए स्थायी समिति के छह सदस्यों के नामों पर बृहस्पतिवार को मुहर लगा दी। एमसीडी सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में आप और भाजपा के तीन-तीन पार्षदों को निर्वाचित घोषित किया गया है। बीते फरवरी माह में इन सदस्यों के चुनाव के दौरान भाजपा के एक पार्षद को मिले मतों में से एक मत पर गतिरोध होने के कारण महापौर ने दोबारा चुनाव कराने की घोषणा की थी। इसके विरोध में भाजपा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
एक मत पर हुआ था विवाद
गत फरवरी माह में सदन की बैठक में भाजपा पार्षद पंकज लूथरा को मिले मतों में से एक मत पर विवाद हो गया था। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने उस मत को सही ठहराया था, मगर महापौर ने उस मत को रद्द करने का फरमान दिया था, लेकिन निगम सचिव और चुनाव आयोग के प्रतिनिधि उनके निर्णय से सहमत नहीं हुए। इसके बाद महापौर ने चुनाव परिणाम घोषित करने के बजाए दोबारा चुनाव कराने की घोषणा की। दरअसल उस मत के रद्द होने पर आप के चार पार्षद जीत जाते और भाजपा के दो पार्षद ही जीत पाते।
भाजपा पार्षद सदन से स्थायी समिति के तीन सदस्य निर्वाचित कराने में कामयाब होने के बाद अब वार्ड समितियों का चुनाव कराने का दबाव बनाएगी। इसकी झलक बृहस्पतिवार को सदन की बैठक में स्पष्ट तौर पर दिखाई दी। वार्ड समितियों के चुनाव होने पर ही स्थायी समिति का गठन हो पाएगा और भाजपा को लग रहा है कि स्थायी समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर उसका कब्जा हो सकता है।
स्थायी समिति में 18 सदस्य होते है, जिनमें से छह सदस्य सदन से चुने जाते है, जबकि एमसीडी की 12 वार्ड समितियों से 12 सदस्य चुने जाते है। प्रत्येक वार्ड समिति से एक-एक पार्षद स्थायी समिति का सदस्य चुनने का प्रावधान है। मनोनीत पार्षद के दम पर भाजपा का पांच वार्ड समिति में बहुमत है, वहीं आप का भी पांच वार्ड समिति में बहुमत है। नरेला वार्ड समिति में दोनों दलों के सदस्यों की संख्या बराबर है और मध्य वार्ड समिति में इन दोनों दलों का बहुमत नहीं है। इस वार्ड समिति में भाजपा से आप आगे है, मगर जीत की चाबी कांग्रेस के हाथ में है।