राजधानी में स्पा सेंटरों की संख्या को लेकर एमसीडी और जस्ट डायल के दावे अलग-अलग हैं। एमसीडी करीब पांच सौ स्पा सेंटरों की बात कह रही है तो जस्ट डॉयल ने इनकी अनुमानित संख्या 5 हजार बताई है।
इस विसंगति से दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) हैरान है। उसका आरोप है कि एमसीडी लाइसेंस देने से पहले कोई साइट इंस्पेक्शन (स्थल निरीक्षण) तक नहीं करती।
डीसीडब्ल्यू ने नोटिस जारी कर जस्ट डायल से पोर्टल पर स्पा सेंटर पंजीकरण से संबंधित जानकारी मांगी थी। सूचना मिली कि स्पा और मसाज सेंटर के कई विज्ञापन जस्ट डायल पर भी हैं।
पोर्टल ने बताया कि अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में 5000 से अधिक स्पा और मसाज सेंटर सूचीबद्ध हैं। उधर, तीनों नगर ने आयोग को बताया था कि राजधानी में 498 स्पा सेंटर चल रहे हैं। अपने इलाके में साउथ एमसीडी ने 297, नॉर्थ एमसीडी ने 127 और ईस्ट एमसीडी ने 60 स्पा चलने की बात कही थी।
आयोग के अनुसार, जस्ट डायल से सूची बनाकर लिखित में देने को कहा गया तो पोर्टल ने डेटा एकत्र करने और सूचना देने के लिए 6 सप्ताह का समय मांगा था। आयोग ने उसे उसे पूरे काम के लिए दो सप्ताह का समय दिया है और 17 अक्तूबर तक पूरी जानकारी मांगी है।
डीसीडब्ल्यू का कहना है कि तीनों एमसीडी में से किसी ने भी लाइसेंसिंग प्रक्रिया को नहीं बदला है और न ही सेक्स रैकेट रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की है।
डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि दिल्ली में 5000 से ज्यादा स्पा चल रहे हैं, जबकि एमसीडी 500 से कम लाइसेंस देने का दावा कर रही है। एमसीडी की लाइसेंसिंग प्रक्रिया मजाक है।