दिल्ली में दिसंबर के शुरुआत में ही नगर निगम के चुनाव हुए थे और तब से अब तक तीन बार मेयर चुनाव की तारीख तय हो चुकी है। लेकिन तीनों ही बार मनोनीत सदस्यों के मताधिकार के मुद्दे को लेकर सदन हंगामे की भेंट चढ़ जाता है।
आम आदमी पार्टी की मेयर उम्मीदवार शैली ओबरॉय ने दिल्ली नगर निगम में सही तरीके से मेयर के चुनाव करवाने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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शैली ओबरॉय ने अदालत में उपराज्यपाल के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उन्होंने मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए मनोनीत सदस्यों को मतदान का अधिकार दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उपराज्यपाल विनय सक्सेना व अन्य लोगों को नोटिस जारी कर मनोनीत सदस्यों के मत अधिकार पर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि दिल्ली में दिसंबर के शुरुआत में ही नगर निगम के चुनाव हुए थे और तब से अब तक तीन बार मेयर चुनाव की तारीख तय हो चुकी है। लेकिन तीनों ही बार मनोनीत सदस्यों के मताधिकार के मुद्दे को लेकर सदन हंगामे की भेंट चढ़ जाता है। तीनों बार ही मेयर का चुनाव नहीं हो सका।
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दरअसल आम आदमी पार्टी का आरोप है कि आज तक कभी भी निगम के मेयर चुने जाने के वक्त मनोनीत सदस्यों ने वोट नहीं दिया। इस बार ऐसा करके भाजपा कम सीटें होने के बावजूद अपना मेयर बनवाना चाहती है। वहीं आप के इस आरोप पर भाजपा का कहना है कि हर बार मनोनीत सदस्य देर से चुने जाते थे और इस बार जब चुन लिए गए हैं तो वह वोट क्यों न दें।