दिल्ली सरकार के स्कूलों में सकारात्मक परिणाम को देखते हुए इसी तर्ज पर स्थानीय निकायों के स्कूलों में भी हैपीनेस करिकुलम लागू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके लिए तीनों एमसीडी के अधिकारी करिकुलम से संबंधित तमाम पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। जनवरी में हुई बैठक के बाद निगमों को इस दिशा में पहल करने को कहा गया था।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इस दिशा में पहल करते हुए हर माह के पहले और तीसरे शनिवार को बैग लेस डे घोषित कर दिया है। 23 सितंबर को राज्य शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इस संबंध में विस्तृत ब्योरा सौंपते हुए भाजपा शासित तीनों निगमों में लागू करने से पहले संभावनाएं तलाशने को कहा है।
एससीईआरटी ने कहा है कि इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिहाज से भी इंतजाम किया जाना चाहिए। पिछले साल शिक्षा निदेशालय की ओर से हैपीनेस करिकुलम दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लागू किया गया था। इस पहल को देखने के लिए अफगानिस्तान और अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुंचा था। फिलहाल लगभग 1000 से अधिक सरकारी स्कूलों में यह करिकुलम चलाया जा रहा है। उत्तरी निगम की ओर से यह करिकुलम समीक्षा के लिए अधिकारियों को लगाया गया है।
19 अक्तूबर से उत्तरी निगम के स्कूलों में बैग लेस डे की शुरुआत की जा रही है। इस दिन स्कूली बच्चों को खेल सहित अन्य गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। निगम की आलाधिकारी के मुताबिक, हर तीसरे शनिवार को बैग लेस डे के अलावा विद्यार्थियों की समय सारणी में जीरो पीरियड भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। उत्तरी निगम क्षेत्र के 700 स्कूलों में हैपीनेस बुक्स भी ऑर्डर किए गए हैं।
दक्षिणी निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है, जबकि पूर्वी निगम ने भी करिकुलम को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर इसे सभी पहलुओं पर विचार करने को कहा है।