फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MCD Election: सोशल मीडिया बना भाजपा का प्रमुख चुनावी हथियार, साइबर योद्धाओं के जरिए केजरीवाल पर बोला हमला

Fri, 18 Nov 2022 01:41 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

MCD Election: दिल्ली भाजपा की सोशल मीडिया टीम के एक सदस्य ने अमर उजाला को बताया कि हमारी रणनीति केवल अरविंद केजरीवाल या दिल्ली सरकार की आलोचना करना ही नहीं है। हम 70 फीसदी फोकस केंद्र सरकार की उन जनहितकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने पर दे रहे हैं, जिसका लाभ दिल्ली या देश के लोगों को मिला है...
विज्ञापन
MCD Election 2022: AAP-BJP Social Media War - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD Election 2022) में भाजपा ने सोशल मीडिया को एक बड़े चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। पार्टी प्रतिदिन एक नए एजेंडे के साथ आम आदमी पार्टी पर हमला बोल रही है। विशेष कार्टून बनाकर वह आम आदमी पार्टी की नीतियों और कथित भ्रष्टाचार के मामले उजागर कर रही है और चुनावी एजेंडा तय करने वाला साबित हो रही है। सोशल मीडिया का अब तक बेहतर इस्तेमाल करती आई आम आदमी पार्टी पार्टी के फेसबुक-ट्विटर हैंडल से पार्टी की नीतियों का प्रचार अवश्य कर रही है, लेकिन वह अब तक कोई बड़ा ट्रेंड सेटर साबित नहीं हो पाई है। सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करने में कांग्रेस सबसे पीछे है।

ये कार्टून बने चर्चा का विषय

विज्ञापन

दिल्ली सरकार की एक्साइज पॉलिसी पर हमला बोलते हुए भाजपा ने 13 नवंबर को ‘लुटेरा’ कार्टून जारी किया। लुटेरा फिल्म के जैसे पोस्टर में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को एक बाइक से जाते हुए दिखाया और इस फिल्म के प्रोड्यूसर के तौर पर महाठग सुकेश और डायरेक्टर के तौर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम लिखा गया। भाजपा से जारी होते ही यह मीडिया में सुर्खियां बन गया और लोग एक बार फिर शराब घोटाले की चर्चा करने लगे। इसी प्रकार बीजेपी ने आम आदमी पार्टी की 10 गारंटी पर भी हमला किया और अरविंद केजरीवाल का एक कार्टून छापते हुए उन्हें ‘महाठग’ के रूप में दिखाया। इस प्रकार भाजपा हर रोज एक नए कार्टून के जरिये दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी पर लगातार हमला बोल रही है।

कौन है पोस्टर वॉर के पीछे

दरअसल, नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला को सोशल मीडिया इंचार्ज पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके साथ तकनीकी मामलों के जानकार पुनीत अग्रवाल और रोहित उपाध्याय ने पार्टी की सोशल मीडिया में कमान संभाली। सोशल मीडिया में पार्टी की विचारधारा से सहमति रखने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को जोड़ा गया। उन्हें ‘साइबर योद्धा’ का नाम देकर पार्टी की विषय वस्तु को लोगों के बीच पहुंचाया गया।      

कैसे तय हो रहे मुद्दे?

दिल्ली भाजपा की सोशल मीडिया टीम के एक सदस्य ने अमर उजाला को बताया कि हमारी रणनीति केवल अरविंद केजरीवाल या दिल्ली सरकार की आलोचना करना ही नहीं है। हम 70 फीसदी फोकस केंद्र सरकार की उन जनहितकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने पर दे रहे हैं, जिसका लाभ दिल्ली या देश के लोगों को मिला है। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन योजना, प्रगति मैदान के आधुनिक निर्माण, भारत वंदना पार्क और दिल्ली के चारों ओर लूप सड़कें बनाकर लोगों को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने जैसे कार्य शामिल हैं।

नेता के मुताबिक, हमारा 30 फीसदी फोकस दिल्ली सरकार और अरविंद केजरीवाल की उन नाकामियों को जनता को दिखाने की है जिसका वादा कर पार्टी सत्ता में आई थी, लेकिन अब तक कोई प्रदर्शन नहीं कर सकी है। इसमें शराब घोटाला, शिक्षा घोटाला, स्वास्थ्य घोटाला, मंत्री सत्येंद्र जैन और अमान्तुल्लाह खान पर लगे आरोपों से संबंधित हैं।

सोशल मीडिया टीम के सभी सदस्यों की एक अनौपचारिक बैठक रोज शाम को होती है, जिसमें अगले दिन का एजेंडा तय कर उससे संबंधित सामग्री तैयार की जाती है। दूसरे दिन इसे सोशल मीडिया के जरिये जारी कर लोगों तक पहुंचाने का काम किया जाता है। बाद में इन्हें लगभग 2000 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिये लोगों तक पहुंचाने का काम किया जाता है।

आम आदमी पार्टी-कांग्रेस पीछे

अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत से ही अरविंद केजरीवाल सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल करते आये हैं। ट्विटर पर कैंपेन चलाकर उन्होंने ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को एक नई ऊंचाई दी थी। 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने सोशल मीडिया को चुनावी हथियार के तौर पर बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया था।

इस समय भी आम आदमी पार्टी और इसके नेताओं के ट्विटर हैंडल से पार्टी के नेताओं के बयान और वीडियो जारी किये जा रहे हैं, लेकिन अभी तक इनमें वह तेजी देखने को नहीं मिली है, जिसकी उम्मीद हुआ करती थी। आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया का उछाला कोई मुद्दा अभी तक ट्रेंड नहीं सेट कर पाया है और वह सोशल मीडिया के चुनावी प्रचार युद्ध में पिछड़ती दिखाई पड़ रही है।  

सोशल मीडिया के वॉर में कांग्रेस सबसे ज्यादा पिछड़ी हुई दिखाई पड़ रही है। पार्टी और इसके नेताओं के ट्विटर-फेसबुक हैंडल से कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़े मुद्दे तो अवश्य उठाये जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम चुनावों को लेकर विशेष सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार के हैंडल से कुछ मुद्दे जरूर उठाये जा रहे हैं, लेकिन वे अब तक कोई ट्रेंड सेट करने में सफल नहीं हो पाए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें