नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने एमबीबीएस में दाखिले के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता वाले छात्रों के आकलन के तरीके में बदलाव किया है। अब दिव्यांगता के प्रकार या प्रतिशत के बजाय छात्रों की काम करने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।
नई गाइडलाइन के तहत, मेडिकल असेसमेंट बोर्ड हर उम्मीदवार की जांच करेगा। यह बोर्ड देखेगा कि छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए कौशल हासिल कर सकता है या नहीं और उसे किन सुविधाओं की जरूरत होगी। एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों को बेंचमार्क दिव्यांगता वाले छात्रों के लिए इनेबलिंग यूनिट बनाने के निर्देश दिए हैं। ये यूनिट छात्रों को पढ़ाई, क्लिनिकल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के दौरान सहायता देंगी। मेडिकल बोर्ड को सहायक उपकरणों और तकनीकी मदद को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा। एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि समान अवसर देना जरूरी है, लेकिन मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। ब्यूरो