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Master Plan 2047: कारों से ज्यादा राहगीरों की फिक्र,पीपल फर्स्ट बनेगी राजधानी; 20 साल में कितनी बदलेगी दिल्ली!

Sat, 15 Aug 2026 03:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली

सार

मास्टर प्लान में पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करने के साथ इसे सार्वजनिक परिवहन के जोड़ने की योजना है।
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demo - फोटो : AdobeStock
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विस्तार
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मास्टर प्लान-2047 में वाहन चालकों से ज्यादा आम लोगों के लिए अधिक फिक्र है। इसी आधार पर अगले बीस साल में दिल्ली की परिवहन व्यवस्था की नई तस्वीर सामने आएगी। इसमें राहगीरों और साइकिल चालकों के साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की मजबूती पर जोर दिया गया है। साथ ही लास्ट माइल कनेक्टिविटी को भी तवज्जो दी गई है। इससे राजधानी की आवाजाही व्हीकल फर्स्ट से पीपल फर्स्ट बनाने की है।

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मास्टर प्लान में पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करने के साथ इसे सार्वजनिक परिवहन के जोड़ने की योजना है। इसमें आवाजाही का ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिसमें आम लोग घर से निकलने के बाद पैदल या साइकिल से मेट्रो, बस या रैपिड रेल तक आसानी से पहुंच सकें। इनसे उतरने के बाद भी अंतिम मंजिल तक पहुंचने में उनको निजी वाहन की जरूरत नहीं होगी। सारी सुविधाएं मांग के हिसाब से होंगी। इसमें किसी भी जगह लंबे वक्त तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

मल्टी मॉडल इंटीग्रेशन इस तरह बदलेगा परिवहन की तस्वीर
मेट्रो, आरआरटीएस, रेलवे, रिंग रेल और बस टर्मिनलों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि यात्री परिवहन के एक माध्यम से दूसरे माध्यम तक आसानी से पहुंच सकें। इसमें हर मेट्रो स्टेशन के 500 मीटर के दायरे पैदल चलने के लिए चौड़े फुटपाथ और स्पिल-ओवर प्लाजा (भीड़ को समेटने के लिए खुले स्थान) होंगे। अलग से वेंडिंग जोन बनेगा। बस स्टॉप, सार्वजनिक शौचालय, पेयजल, बैठने की सुविधा होगी। साइकिल चालकों और राहगीरों को अबाधित रास्ता मिलेगा। बगल में ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी के लिए स्टैंड होंगे। मास्टर प्लान बताता है कि इस तरह की 81 योजनाएं अभी तैयार है। इनको जल्द ही लागू किया जाना है। उधर, लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए इस तरह से इंतजाम होगा, जिससे लोग मेट्रो या बस से उतरने के बाद घर या दफ्तर तक पैदल, साइकिल या ऑटो से आसानी से पहुंच सकें। कभी इनको कार-बाइक सरीखे निजी वाहन की जरूरत महसूस न हो। इसके डिजाइन में बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों को ध्यान में रखा जाएगा।
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एमएमआई को जमीन देगी सरकारी एजेंसी
दिल्ली में बनने वाले हर ट्रांजिट स्टेशन और मल्टी-मोडल ट्रांजिट हब (एमएमटीएच) के डिजाइन में एमएमआई को शामिल किया जाएगा। इसके लिए जो भी जमीन चाहिए होगी, उसे रेलवे, डीडीए, एमसीडी सरीखी भूमि-स्वामी एजेंसी मुहैया कराएगी। एमएमटीएच वह हब होगा, जहां रेल, मेट्रो, बस, ऑटो समेत दूसरे साधन पहले से ही मौजूद हैं। आनंद विहार-कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन-सराय काले खां को इसी तरीके से विकसित किया जाएगा। इसमें परिवहन की सभी परिवहन एजेंसियां मिलकर योजना बनाएंगी और अपनी-अपनी जमीनों को मिलाकर एक ही भवन में कई साधनों से जोड़ेंगी। अगर जमीन के टुकड़े रेल पटरियों या बड़ी सड़कों से अलग-अलग हो रहे हैं तो उन्हें स्काई वॉक या सब-वे से जोड़ा जाएगा। इन हबों में यातायात प्रबंधन का इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम और एआई-आधारित सिस्टम लगाया जाएगा। दिल्ली के प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल, आरआरटीएस और नई मेट्रो लाइनों के स्टेशनों को भी इससे जोड़ा जाएगा। किसी भी टीओडी प्रोजेक्ट को एमएमटीएच के 500 मीटर दायरे में तभी मंजूरी दी जाएगी, जब वह इसकी योजना से जुड़ा हो।

निजी वाहनों के इस्तेमाल को किया जाएगा हतोत्साहित
सरकारी एजेंसियां शहर में टीओडी जोन, हेरिटेज क्षेत्र, मेट्रोपॉलिटन सिटी सेंटर सरीखे इलाके को भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र घोषित करेंगी। यहां वाहनों के प्रवेश पर शुल्क लगेगा। इसे लागू करने के लिए आरएफआईडी टैगिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • दफ्तरों, मनोरंजन केंद्रों, बाजारों में सार्वजनिक पार्किंग की जगह को सीमित किया जाएगा, ताकि लोग निजी गाड़ी लाने से बचें।
  • जिन इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच अच्छी है, वहां ऑन-स्ट्रीट और ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग की आपूर्ति कम की जाएगी।
  • डायनामिक पार्किंग प्राइसिंग यानी पीक समय (सुबह-शाम) और अधिक भीड़ वाले इलाकों में पार्किंग के दाम बढ़ा दिए जाएंगे, ताकि लोग निजी वाहन चलाना महंगा समझें और उसका कम इस्तेमाल करें।

बदलेगी सड़क की डिजाइन

  • पैदल व साइकिल चालकों की अबाधित आवाजाही के लिए पुरानी सड़कों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा सुधारा जाएगा।
  • नई सड़कों और मौजूदा सड़कों में चौड़े फुटपाथ, साइकिल ट्रैक होंगे।
  • जहां भी संभव हो, वहां सड़क के स्तर पर ही पैदल-साइकिल क्रॉसिंग होगी।
  • व्यस्त चौराहों के सिग्नल में राहगीरों के लिए भी ग्रीन लाइट लगेगी।
  • स्कूलों व बाजारों के पास पेलिकन क्रॉसिंग होगी, जहां पैदल यात्री चाहे तो बटन दबाकर सिग्नल बदल सकता है।
  • अगर सबवे या फुट ओवर ब्रिज बनाए जाते हैं, तो उनको उनमें दुकानें, सार्वजनिक कला आदि हों, ताकि वे सुरक्षित और जीवंत लगें।
  • राहगीरों को प्राथमिकता देते पार्किंग और सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग के लिए जगह होगी।
  • ट्रांजिट स्टेशन पर साइकिल पार्किंग, और सार्वजनिक/निजी वाहनों, टैक्सी, आईपीटी के उतरने-चढ़ने के लिए अलग से रास्ते होंगे।
  • जिन इलाकों में राहगीरों की संख्या ज्यादा है, उसे सक्रिय यात्रा क्षेत्र (एटीए) घोषित किया जाएगा। यहां के लिए वॉक प्लान बनेंगे। इनको मेट्रो व बस से जोड़ा जाएगा। डीडीए ने इस तरह के 14 प्लान तैयार कर लिए हैं। इसी तरह पैदल यात्रियों के लिए कॉरिडोर भी बनेगा।
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