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मिनी ट्रक नहीं अब मारुति में हो रहीं मछलियां सप्लाई

Thu, 05 Nov 2015 01:31 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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गंगनहर से मछलियों को निकालकर सप्लाई करने में अब मारुति की इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस की सख्ती के बाद माफिया ने मिनी ट्रक लाने बंद कर दिए हैं। यह दावा ग्रामीणों ने किया है।
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वहीं मछली माफियाओं ने गंगनहर में जहर डालकर बड़ी मछलियों के साथ ही उनके नन्हें बच्चों को भी निकालना शुरू कर दिया है। फाइव स्टार होटलों में मछली के नन्हें बच्चों का भुजिया बनाने में प्रयोग किया जाता है।

ये मछलियों से भी ज्यादा महंगे दामों पर बिकते हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि इन छोटी मछलियों के शरीर में ज्यादा जहर रह जाता है।

इनका सेवन करने वालों को भयानक बीमारियां हो सकती हैं। ग्रामीणों के अनुसार जहर बहरामपुर के पास जंगल में डाला गया है।

दिल्ली और मुंबई में मछलियों के छोटे बच्चों का भाव एक हजार रुपये किलो तक है। पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के डर से माफियाओं ने अब मिनी ट्रक लाने बंद कर दिए हैं।
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जहर डालने के खिलाफ आवाज उठाते रहे मौ. सरदार खां ने बताया कि माफिया अब मारुति वैन में मछलियों को लेकर लगातार मेरठ की ओर भोला की झाल की ओर ले जाकर मिनी ट्रकों में एकत्रित कर लेते हैं।

वहीं से इनको मंडियों में सप्लाई किया जाता है। रसायन मिले होने के कारण ये जल्दी से खराब नहीं होती हैं। फूड सेफ्टी अधिकारी डा. केके यादव के अनुसार जहर से मरने वाली मछलियों पर ऊपर से देखने पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता है।
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इनके स्वाद में भी अंतर नहीं आता है। छोटी मछलियों में जहर की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। जहरीली मछलियों के खाने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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