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मारुति विवाद : जियालाल ने सुपरवाइजर मांझी को मारा था थप्पड़, तब शुरू हुआ विवाद

Sat, 11 Mar 2017 08:39 AM IST
अमर उजाला, गुरुग्राम
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maruti
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पांच साल पहले मानेसर प्लांट में हुए विवाद की जड़ मामले में हत्या का दोषी करार दिया जींद निवासी जियालाल था। घटना वाले दिन उसकी पेंटशॉप में तैनात सुपरवाइजर रामकिशोर मांझी से कहासुनी हुई थी। जियालाल ने मांझी को थप्पड़ मार दिया थाए जिसके बाद वारदात हुई थी। घटना में कंपनी के तत्कालीन महाप्रबंधक एचआर अवनीश कुमार देव जिंदा जल गए थे। 
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जियालाल ने मारुति यूनियन के पदाधिकारी राममेहर व अन्य श्रमिकों को गलत तरीके से घटना का ब्योरा दिया। जिसके बाद श्रमिकों ने काम बंद कर दिया था। कंपनी प्रबंधन ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए श्रमिक नेताओं से बातचीत शुरू की थी। शाम छह बजे बातचीत के दौरान ही श्रमिक नेता राममेहर ने मुख्य महाप्रबंधक बीरेंद्र प्रकाश को स्टूल मार दिया था।

केस डायरी के मुताबिक यह दृश्य देख अन्य अधिकारी आगे आए तो श्रमिक नेताओं ने मारो.मारो का शोर मचा काम कर रहे अन्य कर्मचारियों को बुला लिया और आगजनी शुरू कर दी थी। थाना मानेसर में पुलिस ने कंपनी के जीएम दीपक आनंद की शिकायत पर 54 आरोपियों को नामजद करते हुए करीब 600 लोगों के खिलाफ हत्याए हत्या के प्रयास, साजिश रचने के आरोप के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में पहचान के बाद पुलिस ने कई अन्य श्रमिकों को नामजद किया था।
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पहले से था गुस्सा
18 जुलाई 2012 को मारुति कंपनी में यूं ही नहीं  हिंसक घटना हुई थी बल्कि इसके लिए कई श्रमिक नेता पहले से मौके की तलाश में थे। जिया और मांझी के बीच हुए विवाद ने उन्हें मौका दे दिया। कंपनी प्रबंधन के प्रति मामले के मुख्य आरोपियों में से एक श्रमिक नेता राममेहर निवासी गांव गुहला चीका जिला कैथल की पहले से नहीं पट रही थी।

वो कोई भी मांग कंपनी के आगे रखते थे तो महाप्रबंधक एचआर अवनीश देव नकार देते थे। जिसके चलते उनके प्रति उसके तथा अन्य श्रमिकों के मन में अधिक गुस्सा था। बस वो मौके की तलाश में थे कि उन्हें तथा अन्य अधिकारियों को सबक सिखाया जाए। जियालाल को निलंबित किए जाने से उसे मौका मिल गया। घटना भी ऐसी हुई कि तत्कालीन प्रदेश व केंद्र सरकार तक हिल गई थी। यह भी बात सामने आने लगी थी कि मारुति प्रबंधन प्लांट को दूसरे प्रदेश में शिफ्ट कर लेगा।

वारदात कर बन गए थे बाबा
घटना के बाद आरोपी समझ चुके थे कि पुलिस उन्हें खोज लेगी। बचने के लिए राममेहर व अन्य ने अलग.अलग टोली बनाई और भगवा कपड़े पहने और हरिद्वार पहुंच गए थे। वहां दो दिन रहने के बाद वह नीलकंठ जाने की तैयारी में थे कि पुलिस ने उन्हें दसवें दिन दबोच लिया था। जियालाल फिर भी वहां से बच निकला था। सभी आरोपियों की खोजबीन में पुलिस के पांच सौ जवान लगाए गए थे। अकेले जियालाल को पकड़ने में ही सौ पुलिसकर्मी लगे हुए थे। जियालाल को 14 अगस्त को धारूहेड़ा में एक रिश्तेदार के यहां से पकड़ा गया था।
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