दिल्ली में घर का नक्शा पास कराना जल्द ही काफी आसान हो जाएगा। दिल्ली सरकार ने यूजर फ्रेंडली नए भवन उपनियम को अधिसूचित करने के लिए मंजूरी दी है।
जहां 105 वर्ग मीटर तक के रिहायशी मकान की राह फार्म सरल-एक और सरल-दो आसान करेगा, वहीं बड़े मकान का नक्शा पास कराने के लिए विभागों की चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऑनलाइन एक बार आवेदन करना होगा, जहां से सभी विभागों में पहुंच जाएगा। तीस दिन में नक्शा को मंजूर करने या नामंजूरी की अनिवार्यता की गई है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि जल्द ही दिल्ली भवन उपनियम, 2916 को अधिसूचित कर दिया जाएगा। इसमें मोबाइल टावर और सोलर रूफटॉप के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
105 मीटर के लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं
नए उपनियम में 105 वर्ग मीटर तक का मकान बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं है। मकान निर्माण शुरू करते समय सरल-एक फार्म और निर्माण पूरा होने पर सरल-दो भरकर जमा कराना है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि स्थानीय निकायों ने ऑनलाइन सिस्टम तैयार कर लिया है। जहां सभी तरह के कर, शुल्क और अतिरिक्त एफएआर का ऑटोमैटिक कैलकुलेशन होगा। सिंगल विंडो सिस्टम व्यवस्था आने से राजधानी में रियल एस्टेट बिजनेस करना भी आसान होगा।
उपनियम में 105-700 वर्ग मीटर तक के भवन और 250 वर्ग मीटर तक के गोदाम को लो-रिस्क क्षेत्र में रखा गया है, इनका नक्शा 30 दिन में पास होगा। निर्माण शुरू करने केलिए स्वीकृति की अनिवार्यता भी हटा दी गई है।
दिल्ली के नए भवन उपनियम की कुछ खास बात
- फोटो : home vastu
दिल्ली भवन उपनियम, 2016 में यह भी साफ किया गया है कि 105 वर्ग मीटर से बड़े भवन निर्माण में ग्रीन बिल्डिंग नियम का पालन अनिवार्य किया गया है। निर्माण में जल संरक्षण व प्रबंधन, सोलन एनर्जी उपयोग, ऊर्जा संरक्षण और प्रबंधन की स्वीकृति भी लेनी होगी।
दिल्ली केनए भवन उपनियम में यह प्रावधान रखा गया है कि स्कूल, कॉलेज, विधानसभा, व्यवसायिक केन्द्र, ग्रुप हाउसिंग में यूनिवर्सल डिजाइन रखना होगा। जिसमें दिव्यांग, बुजुर्ग और बच्चों के आवागमन में कोई दिक्कत ना हो।
दिल्ली के नए भवन उपनियम की कुछ खास बात
-फार्म भरने केलिए किसी एक्सपर्ट की अनिवार्यता नहीं
-105 मीटर से बड़े मकान पर ग्रीन बिल्डिंग नियमों का पालन करना जरूरी
-3 हजार वर्ग मीटर से बड़े साइज के भवन में वॉशरूम जरूरी
-20 हजार वर्ग मीटर से 1.5 लाख वर्ग मीटर तक के भवन निर्माण में पर्यावरण क्लीयरेंस अनिवार्य होगा।
-भवन निर्माण में स्ट्रक्चरल सेफ्ट और भूकंप आपदा शमन के सुरक्षा उपाय की अनिवार्यता रखी गई।