मथुरा जैसे कई और मामले यमुना प्राधिकरण व ग्रेनो प्राधिकरण में हैं। जहांगीरपुर में 80 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी गई, जबकि उस समय यमुना प्राधिकरण के पास जमीन थी। इसकी भी शिकायत पर जांच हुई है। जांच रिपोर्ट बनाकर चेयरमैन को भेज दी गई है। कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान से बाहर की जमीन खरीदी गई थी।
वहीं जेवर से आगे 22 गांवों की जमीन खरीद घोटाले में भी गड़बड़ी हुई थी। इसमें भी करोड़ों रुपये की जमीन बिना किसी ठोस प्लान के खरीद ली गई। इसकी भी जांच चल रही है। इसी तरह हिंडन के डूब क्षेत्र में जमीन खरीद ली गई। इससे करीब 23 करोड़ रुपये का नुकसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को हुआ है। कई घोटालों में कुछ नाम कॉमन हैं। इनमें अधिकारियों के साथ ही नेताओं के भी नाम हैं।