दो तरह से किया सर्वे
एम्स के नेशनल ड्रग डिपेन्डेंस ट्रीटमेंट सेंटर के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अतुल आंबेकर ने बताया कि दिसंबर 2017 से अक्तूबर 2018 के बीच देश 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जाकर 10 से 75 वर्ष तक के लोगों पर दो प्रकार से सर्वे किया है। सबसे पहले एम्स की टीम ने हर राज्य के साढ़े 12 हजार परिवारों का साक्षात्कार किया।
इसके तहत 2 लाख से ज्यादा घरों में पहुंचकर 4 लाख 73 हजार लोगों से साक्षात्कार किया। वहीं आरडीएस के तहत नशे की लत में डूबे 72 हजार लोगों से साक्षात्कार करने के बाद पहली बार राज्य स्तर पर मादक पदार्थों के सेवन और उसकी लत के शिकार लोगों की स्थिति सामने लाई गई है। शराब, गांजा-भांग-चरस और अफीम-डोडा-हेरोइन तीन वर्गों में चिंताजनक स्थिति सामने आई है।
क्या है सर्वे का मकसद
सेंटर के निदेशक डॉ. राकेश कुमार चड्डा ने बताया कि अभी तक किसी विशेष राज्य को नशे से जोड़कर देखा जाता है जबकि सच्चाई कुछ और ही है। नशा एक बीमारी है, इसका इलाज लोगों को लेना चाहिए। इस सर्वे के पीछे भी यही मकसद है। डॉ. अतुल बताते हैं कि सर्वे के दौरान चौंकान्ने वाली बात यह सामने आई कि लोगों को नशे से बचाने के लिए इलाज नहीं है। इसलिए सर्वे के जरिए सरकार से ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की मांग की है, ताकि नशे की लत के शिकार लोगों को इलाज मिल सके।
16 करोड़ लोग शराब की चपेट में
पिछले दिनों जहरीली शराब के सेवन से कई जिंदगियां और परिवार तबाह हो गए। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश की 14.6 फीसदी आबादी यानि 16 करोड़ लोग (10-75 आयु वर्ग) शराब की चपेट में हैं। इनमें से देशी शराब पीने वालों की संख्या करीब 8 करोड़ है। 1.6 फीसदी महिलाएं शराब पीती हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 27.3 फीसदी है। छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पंजाब, अरुणांचल प्रदेश और गोवा में शराब पीने वाले ज्यादा हैं।
बच्चों के बीच भी पहुंचा भांग-गांजा और चरस
डॉ. अतुल आंबेकर के अनुसार शराब के बाद देश में भांग-गांजा और चरस को बड़े पैमाने पर नशे के रूप में सेवन किया जाता है। 10 वर्ष तक की आयु के मासूमों में भी इसकी लत है। देश में 3 करोड़ 10 लाख लोग इसकी चपेट में हैं, जिनमें से 72 लाख लोगों को तुरंत इलाज की जरूरत है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, सिक्किम और छत्तीसगढ़ के अलावा देश की राजधानी दिल्ली में इनका सेवन करने वाले सबसे ज्यादा लोग हैं।