लॉकडाउन में दिल्ली की सैकड़ों सेक्स वर्कर्स के लिए की मदद के लिए कई संगठन आगे आए हैं। लेकिन उन्हें एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और वो है इनमें से प्रत्येक महिला तक पहुंचना।
कुछ सेक्स वर्कर्स को पिछले लॉकडाउन के समय राशन, सैनिटरी आवश्यकताओं की चीजें, सैनिटाइजर, साबुन और दवाइयां मिलीं हैं, लेकिन अब लॉकडाउन में विस्तार के बाद, उन्हें और मदद की जरूरत है। लॉकडाउन के समय में ही कई खबरें सामने आई हैं कि कैसे ये महिलाएं बिना पैसे, भोजन और दवा के जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
अपनी पहचान न बताने की शर्त पर एक महिला ने बताया कि लॉकडाउन का शुरुआती सप्ताह भयानक था, लेकिन अब हमें बीते 15-20 दिनों से कुछ मदद मिल रही है। हम में से कई ने एनजीओ से राशन प्राप्त किया है, लेकिन यह कब तक चलेगा। यह हम अभी भी नहीं जानते हैं। हमारे पास अभी भी खाना पकाने के लिए रसोई गैस सिलेंडर या मिट्टी का तेल नहीं है।
गार्स्टिन बैस्टियन रोड (जिसे अब स्वामी श्रद्धानंद मार्ग के रूप में जाना जाता है) पर सेक्स वर्कर्स बहुमंजिला तंग क्वार्टरों में रहती हैं, जिसके चलते इन सब तक पहुंचना आसान नहीं है। यहां लगभग 100 वेश्यालय हैं जहां 1500 से अधिक सेक्स वर्कर्स काम के लिए रहती हैं।
भारती पाटिता के दिल्ली यूनिट सचिव इकबाल अहमद ने बताया कि वे कैमरों से इतना डरते हैं कि अगर कोई संस्था कैमरे के साथ मदद के लिए आए तो वे बाहर ही नहीं आते। कई बार तो उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनकी मदद के लिए कुछ वितरण किया जा रहा है। भारती पाटिता पिछले चार दशकों से सेक्स वर्कर्स की मदद कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सेवा भारती, प्रयास, कट कथा, सुपर सिख फाउंडेशन और पुलिस परिवार कल्याण सोसायटी जैसे एनजीओ ऐसे समय में उनकी मदद करने के लिए सामने आए हैं।
प्रयास एनजीओ के निदेशक विश्वजीत घोषाल ने बताया कि हमने अन्य संगठनों की मदद से लगभग 800 महिलाओं की पहचान की है। हम वितरण के दूसरे चरण में उनमें से प्रत्येक तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। पहले चरण में हमने 300 महिलाओं को राशन किट वितरित किए हैं।
घोषाल ने बताया कि पहले चरण में हमें संसाधनों की खरीद में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन अब चूंकि लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है और पीएम केयर्स फंड बनाया गया है, तो प्रत्येक पीएसयू या कॉर्पोरेट कहते हैं कि वे उस फंड में योगदान दे रहे हैं। इसके बाद भी हम मदद करने के लिए दृढ़ हैं।
एक अन्य एनजीओ कट कथा ने इन महिलाओं के लिए एक ऑनलाइन क्राउड फंडिंग अभियान शुरू किया है।
कट कथा की संस्थापक सदस्य गीतांजलि बब्बर ने बताया कि हमने पहले चरण में 2,47,000 रुपये जुटाए हैं और अब हमने अगले चरण के लिए काम शुरू कर दिया है। हमारा उद्देश्य हर एक सेक्स वर्कर तक पहुंचना है। शुरू में हमने एसडीएम की मदद से पका हुआ भोजन वितरित किया और पिछले रविवार गूंज और नो टीयर्स जैसी एनजीओ की मदद से लगभाग 750 किट वितरित की।
इन किटों में कच्चा राशन, सेनेटरी नैपकिन, बच्चों का भोजन, दूध पाउडर, साबुन, सैनिटाइजर आदि शामिल हैं। बब्बर ने कहा कि हम गैस या मिट्टी के तेल या फिर पके हुए भोजन की व्यवस्था करने की भी कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें किसी अन्य काम में शामिल करने की योजना बना रहे हैं ताकि वे कुछ पैसे कमा सकें।