मानसून शुरू होते ही राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में जर्जर और खतरनाक भवनों के ढहने का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। तीनों निगमों की ओर से लाखों भवनों का सर्वे किया गया। इनमें उत्तर निगम क्षेत्र में 49 भवनों की पहचान खतरनाक के तौर पर की गई, जबकि दक्षिणी और पूर्वी निगम के आंकड़ों के मुताबिक वहां एक भी खतरनाक इमारत नहीं है। समय रहते यदि अहम कदम नहीं उठाए तो राजधानी में कभी भी मुंबई की तरह बड़ा हादसा हो सकता है।
उत्तरी नगर निगम की ओर से किए गए सर्वे में सिटी सदर पहाड़गंज क्षेत्र में सर्वाधिक 26 भवनों की पहचान की गई। उत्तरी निगम के तहत साढ़े सात लाख भवन हैं, जबकि दक्षिणी और पूर्वी निगम क्षेत्र भी भवनों की संख्या लाखों में है। इन आंकड़ों से निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सर्वे के बाद 88 इमारतों को मरम्मत के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। दक्षिणी नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, निगम क्षेत्र में एक भी खतरनाक बिल्डिंग की पहचान नहीं हुई है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
पिछले साल सावन पार्क में पुरानी हो चुकी इमारत के ढहने की वजह से पांच लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा भी कुछ जगहों पर जर्जर हो चुकी इमारतों के गिरने का खतरा मंडरा रहा है, जिनके लिए निर्देश जारी करने में देरी कभी भी हादसे का सबब बन सकता है।
चंद महीनों में लाखों भवनों का सर्वे
लाखों भवनों का सर्वे महज चंद महीनों में करने का निगमों का दावा है, लेकिन प्रायोगिक तौर पर 10 लाख से अधिक भवनों का सर्वे करने में काफी वक्त लग सकता है। तीनों निगमों की ओर से महज 49 भवनों की ही खतरनाक के तौर पर पहचान हुई है। लाखों भवनों के सर्वे में खतरनाक भवनों की संख्या पर कई बार निगम की बैठकों में भी पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। बावजूद इसके, ना तो उचित सर्वे किया गया और ना ही इन पर कार्रवाई की गई।