कैबिनेट बैठक के बाद सचिवालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में राशन चोरी में राजनीतिज्ञ से लेकर अधिकारी तक शामिल है।
हम इसके खिलाफ सत्ता में नहीं आने से पहले लड़ाई लड़ रहे है। सत्ता में आने के बाद भी इसमें पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रहे है। इसके लिए पीओएस (बॉयोमैट्रिक मशीन) के जरिए राशन वितरण की योजना बनी।
मगर इंटरनेट सेवाएं ठीक नहीं होने से यह फ्लॉप हो गई। आम लोग परेशान हो रहे है। इसलिए हम डोर स्टेप डिलिवरी योजना लाना चाहते है। जिसमें राशन का पैकेट राशनकॉर्ड धारक के घर पहुंचा दिया जाएगा।
मनीष सिसोदिया बताया कि हमने पहले इस योजना को लाने के लिए जनवरी तक का लक्ष्य रखा था। मुख्य सचिव ने इसे 20 फरवरी की कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने की बात कही। हमने मान लिया मगर 27 फरवरी की कैबिनेट में भी प्रस्ताव लेकर नहीं आएं।
फिर मनीष सिसोदिया एक मार्च की कैबिनेट में लाने को कहा मगर बृहस्पतिवार को फिर वह लेकर नहीं आए। जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अगले कैबिनेट बैठक यानि मंगलवार को प्रस्ताव के साथ हर हाल में आने की बात कही तो अब पता चला कि फूड कमिश्नर छुट्टी पर चले गए है। वह बिना मंत्री और मुख्यमंत्री को बताएं।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी ने कहा था कि कोई भी प्रधान सचिव या आयुक्त स्तर का अधिकारी बगैर मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के छुट्टी पर नहीं जाएगा। मगर अधिकारी इस योजना को शुरू से ही टालने की कोशिश में जुटे है। हम एलजी साहब से पूछना चाहते है कि आप इन अधिकारियों को जो राशन चोरी में शामिल है उन्हें क्यों प्रोटेक्ट कर रहे है। क्या वह इनपर बगैर पूछे छुट्टी पर जाने पर कार्रवाई करेंगे।