दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एसीबी और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया है।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली के एक एसडीएम ने डीडीए के दो अधिकारियों को घूस लेते गिरफ्तार किया। अपनी शिकायत के साथ वह लोकल पुलिस के पास गए और इन अधिकारियों को गिरफ्तार करने की मांग की।
स्थानीय पुलिस ने इस मामले पर कोई कार्यवाही करने से मना कर दिया और एसडीएम को एंटी करप्शन ब्यूरो में जाने को कहा। एसडीएम जब अपनी शिकायत ले कर एसीबी में गए तो वहां भी उनके साथ वैसा ही सलूक किया गया।
एसीबी में काम कर रहे ड्यूटी ऑफिसर ने उनकी शिकायत लेने से मना कर दिया और उन्हें एसएचओ के पास भेज दिया। जब मामला एसएचओ के पास गया तो उन्होंने इसे डीसीपी के ऑफिस में ले जाने की बात कह कर कोई कार्यवाई करने से मना कर दिया।
हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि स्वाति मालिवाल की नियुक्ति से संबंधित फाइल एलजी नजीब जंग के पास भेज दी गई है।
अंत में दोनों भ्रष्टाचारियों को छोड़ना पड़ा
मनीष सिसोदिया का आरोप है कि इस तरह खुलेआम एक एसडीएम स्तर के अधिकारी के द्वारा भ्रष्टाचार करते रंगे हाथ पकड़े गए दो अधिकारियों को शाम को अंततः छोड़ना पड़ा क्योंकि दिल्ली पुलिस से लेकर एसीबी तक ने उन्हें गिरफ्तार करने से मना कर दिया।
मनीष ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार दिल्ली में एसीबी और दिल्ली पुलिस को नियंत्रित करना चाहती है। जबकि उनसे सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसे भ्रष्टाचार जैसे मंत्रालय ही नहीं सभाले जा रहे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी से मिली करारी हार से बीजेपी बौखलाई हुई है और इसका बदला वह दिल्ली की जनता से ले रही है।
'विजिलेंस का ही हिस्सा है एसीबी'
मनीष ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से यह गुजारिश करते हैं कि वह दिल्ली की चुनी हुई सरकार को काम करने दें। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की उनकी कोशिशों को रोकने के लिए वह एसीबी और दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
मनीष ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि दिल्ली में एसीबी को दिल्ली सरकार से अलग करने की कोशिश की जा रही है जबकि कानून के मुताबिक विजिलेंस विभाग दिल्ली सरकार के अधीन आता है।
एसीबी भी विजिलेंस विभाग का ही हिस्सा है। ऐसे में उसे दिल्ली सरकार के नियंत्रण से बाहर रखना गैरकानूनी भी है।