सिसोदिया ने कहा कि यदि सीएम और शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को विदेश भेजने का फैसला किया है तो एलजी बार-बार मामूली आपत्तियां लगाकर इसे कैसे रोक सकते हैं। यह लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है कि एक अनिर्वाचित व्यक्ति लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का हर निर्णय बदल रहा है। हमारे देश का संभ्रांत वर्ग सामंती मानसिकता का शिकार है। वह अपने बच्चों को विदेश भेजना चाहते हैं, लेकिन गरीब बच्चों के शिक्षकों को विदेश भेजने का कड़ा विरोध करते हैं और कास्ट बेनिफिट एनॉलिसिस चाहते हैं। 21वीं सदी के भारत में ऐसी सामंती मानसिकता की कोई जगह नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक एलजी के पास मंत्रिपरिषद के किसी भी निर्णय पर कास्ट बेनिफिट एनॉलिसिस करने का आदेश देने की शक्ति नहीं है। उन्होंने एलजी से अपील की है कि वे या तो प्रस्ताव को मंजूरी दें या इसे राष्ट्रपति के पास भेजें। दोबारा प्रस्ताव भेजे जाने को लेकर केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि एलजी दिल्ली सरकार के स्कूलों के टीचर्स को ट्रेनिंग के लिए विदेश जाने की अनुमति देंगे।