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ट्रांसफर के अधिकार को लेकर झगड़ाः सिसोदिया बोले- आदेश अच्छा लगे या नहीं, कोर्ट का ऑर्डर मानना होगा

Thu, 05 Jul 2018 11:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में अधिकारों को लेकर चल रही जंग पर 4 जुलाई को आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी दिल्ली में रजानीतिक खींचतान जारी है। सिसोदिया के ट्रांसफर पोस्टिंग आदेश को अधिकारियों ने मानने से इनकार कर दिया है। इसी के बाद से दिल्ली सरकार ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

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मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए बताया कि अफसर अदालत का आदेश नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोकतंत्र कैसे चलेगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा आदेश अच्छा लगेगा या नहीं कोर्ट का ऑर्डर तो मानना पड़ेगा। उन्होंने सब लोगों से अपील की है कि सहयोग से काम करें।

सिसोदिया ने ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में केंद्र सरकार और एलजी से सहयोग भी मांगा है। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह चला तो क्या अब दिल्ली में ट्रांसफर पोस्टिंग नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हमें केंद्र सरकार और एलजी के सहयोग की जरूरत है।

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ये है मामला

फाइल फोटो
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही। दिल्ली के सेवा विभाग के अधिकारियों ने पुराने हिसाब के मुताबिक काम करने का फैसला किया है, जिसके मुताबिक ये विभाग एलजी के पास था। इससे दिल्ली में प्रशासनिक संकट पैदा हो सकता है।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नियुक्ति व तबादले के बारे में नया आदेश जारी कर दिया है, लेकिन अधिकारी इसे कानूनी तौर पर गलत बता रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शीर्षस्थ अधिकारियों ने इसकी जानकारी भी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दे दी है।

अधिकारियों ने बता दिया है कि वह इस आदेश को नहीं मानेंगे। नाम उजागर न करने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेवा संबंधी मामले अभी भी उपराज्यपाल के पास हैं।
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पीएम मोदी बैजल केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
मई 2015 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के इससे जुड़े नोटिफिकेशन पर बुधवार का फैसला लागू नहीं होता। इसके अनुसार सेवा संबंधी मामले उपराज्यपाल के अधीन चले गए थे। फिर केंद्र शासित प्रदेश होने से यह मामला समवर्ती या राज्य सूची में भी नहीं है।

वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस मसले से जुड़ी एक याचिका पर अभी सुप्रीम कोर्ट की रेगुलर बेंच में सुनवाई चल रही है। लिहाजा सरकार को इस पर आदेश नहीं जारी करना था।
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