मनीष सिसोदिया का आरोप है कि 2020 में जब देश-दुनिया में कोरोना फैला हुआ था, उस दौरान इमरजेंसी की आड़ में हेमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की कंपनी को पीपीई किट के ठेके दिए गए। जबकि इस कंपनी का मेडिकल सप्लाई से कोई लेना-देना नहीं था। उनका आरोप है कि उस समय बाजार में पीपीई किट की कीमत 600 रुपये थी, जबकि मुख्यमंत्री की पत्नी की कंपनी को 990 रूपये प्रति पीपीई किट कीमत दी गई। इतना ही नहीं, हेमंत बिस्वा सरमा के बेटे के बिजनेस पार्टनर की कंपनी को भी प्रति पीपीई किट 990 रुपये में ठेके दिए। जबकि दोनों कंपनियां सप्लाई पूरा करने करने में सफल नहीं रहीं। इसके बावजूद भी इन कंपनियों को और ठेके दिए गए और इस बार एक पीपीई किट की कीमत 1680 रुपये थी। यह सप्लाई असम के बजाय दिल्ली में असम भवन में करने के लिए कहा गया।
मनीष सिसोदिया का आरोप है कि असल भ्रष्टाचार यह है, जिसे पद पर रहते हुए तब के स्वास्थ्य मंत्री व वर्तमान में असम के मुख्यमंत्री ने किया। साथ ही सवाल किया कि भाजपा के लोग अपने इतने बड़े नेता व एक प्रदेश के मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर चुप क्यों है? इसके उलट दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को फर्जी आरोप लगाया और जेल भेज दिया। जब इस और इसी तरह के दूसरे मामलों की अदालत में सुनवाई होती है, तो भाजपा का हर एक आरोप झूठा साबित हो जाता है।
उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन को भाजपा की ईडी ने जेल में डाला है जबकि कल खुद कोर्ट में ईडी द्वारा ये माना गया कि सत्येंद्र जैन को आरोपी नहीं बनाया गया है अभी केवल उनसे पूछताछ चल रही है। सिसोदिया ने कहा कि जब पूछताछ हो रही है तो उन्हें जेल में क्यों डाला गया।