फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानेसर जमीन घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 67 करोड़ की संपत्ति अटैच

Fri, 26 Jul 2019 10:45 PM IST
शाहरुख खान एजेंसी, नई दिल्ली
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को हरियाणा के मानेसर में जमीन घोटाले में करीब 67 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। आरोप है कि इस मामले में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन का अवैध अधिग्रहण किया गया। 
विज्ञापन


एजेंसी ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत इन संपत्तियों को अटैच करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया गया है। अटैच संपत्ति में गुरुग्राम स्थित महामाया एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की 43.54 करोड़ रुपये की 14.56 एकड़ जमीन और अन्य आरोपियों के 23.03 करोड़ के बैंक बैलेंस और चार एकड़ जमीन शामिल हैं।

दरअसल, कई किसानों और जमीन मालिकों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ 1500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इस मामले में कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुडा भी आरोपी हैं। 
विज्ञापन


ईडी के अनुसार मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला (इसे नखरोला भी कहा जाता है) के ग्रामीणों और किसानों की करीब 668 एकड़ पुश्तैनी जमीन थी। 2004 से 2007 के बीच उन्हें उसमें से करीब 400 एकड़ जमीन निजी लोगों को सस्ते दाम पर बेचने के लिए बाध्य किया गया। 
विज्ञापन

ऐसा न करने पर उन्हें उस जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहीत करने की धमकी दी गई। एजेंसी ने हरियाणा पुलिस की एफआईआर के आधार पर सितंबर 2016 में कथित जमीन घोटाले के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।

1600 करोड़ की जमीन 100 करोड़ में खरीदी
जांच एजेंसी ने पाया कि उस वक्त जमीन की कीमत 4 करोड़ प्रति एकड़ थी। उस हिसाब से निजी बिल्डरों ने 400 एकड़ जमीन मात्र 100 करोड़ में उनके मालिकों से खरीद ली। इस मामले में ईडी ने पहले भी 42.19 करोड़ की संपत्ति अटैच की थी।

सरकार ने किसानों से लेकर बिल्डरों को सौंपा
आरोप है कि शुरू में हरियाणा सरकार ने औद्योगिक मॉडल टाउनशिप बनाने को 912 एकड़ जमीन अधिग्रहीत करने की अधिसूचना जारी की। उसके बाद कथित रूप से उन प्लॉट को प्राइवेट बिल्डरों ने औने-पौने दाम पर भू स्वामियों से हथिया लिया।

फिर प्रदेश सरकार के उद्योग विभाग के निदेशक ने कथित तौर पर सरकारी नीति का उल्लंघन करते हुए 24 अगस्त, 2007 को एक आदेश जारी कर उक्त जमीन को अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर कर दिया। और उनके असली मालिकों को सौंपने के बजाय बिल्डरों, उनकी कंपनियों और एजेंटों के नाम पर करने को कहा।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें