पुलिस ने बताया है कि गुलशन का गांधीनगर दिल्ली में जीन्स का कारोबार था। संजना उसी फैक्ट्री में मैनेजर थी। गुलशन का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और इसी के चलते उन्हें शालीमार गार्डन की पॉश सोसायटी छोड़कर अक्तूबर में इंदिरापुरम शिफ्ट होना पड़ा।
पुलिस को गुलशन के फ्लैट से दीवार पर लिखा एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें राकेश वर्मा को तीनों की मौत का जिम्मेदार बताया गया है जिसकी पहचान गुलशन के सगे साढू के रूप में हुई है। सुसाइड नोट के साथ ही शवों के क्रिया कर्म के लिए 500-500 के नोट भी दीवार पर चिपकाकर छोड़े गए थे।
500 के नोटों के साथ ही एक बाउंस चेक भी छोड़ा गया था। पुलिस ने बताया कि इसी बाउंस चेक के चलते गुलशन के परिवार की हालत खस्ता हो गई थी और उन्होंने इतना बड़ा फैसला ले लिया। जिससे पूरा परिवार खत्म हो गया। बताया जा रहा है कि आरोपी साढू राकेश वर्मा चेक बाउंस के केस में पहले भी जेल जा चुका है।
एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया की दिल्ली के झिलमिल में पैतृक संपत्ति के बंटवारे के दौरान गुलशन के हिस्से में दो करोड़ रुपये आए थे। जो उसने अपने साढ़ू राकेश वर्मा के साथ बिजनेस में लगा दिए थे। एसएसपी के मुताबिक राकेश वर्मा गुलशन के पैसे नहीं लौटा रहा था, जबकि बाजार में उस पर देनदारी का दबाव था। कमरे से जो बाउंस चेक बरामद हुए हैं, वह भी करीब एक करोड़ रुपये के हैं।