सुशांत लोक स्थित पारस अस्पताल में 16 वर्षीय किशोर के मस्तिष्क का ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर उसकी आंखों की रोशनी वापस लाई गई। हालांकि डॉक्टरों के मुताबिक न्यूरो साइंस के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ है।
ऐसे मामले में पहले ही बता दिया जाता है कि आंखों की रोशनी नहीं आएगी, लेकिन इस मरीज के साथ ऐसा होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस पर शोध किया जा रहा है।
पटना के रहने वाले 16 वर्षीय आशीष रंजन को दिसंबर 2015 में दाईं आंख से धुंधला दिखने की शिकायत की तो उसके अभिभावक उसे नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास ले गए, जहां उसे कुछ दवाइयां खाने और चश्मा लगाने की सलाह दी गई।
लेकिन इसका असर विपरित हुआ और आखिरकार पूरी रोशनी ही चली गई। दोनों पुतलियां फैल गई थीं। जिसके बाद डॉक्टरों ने आंखों की रोशनी कभी नहीं आने की बात कही।
13 फरवरी को पारस अस्पताल लाया गया, जहां पहले ही बता दिया गया कि आंखों की रोशनी आने की संभावना कम है। सभी जांच के न्यूरोसाइंस विभाग के निदेशक पद्मश्री डॉ. वीएस मेहता की टीम ने करीब चार घंटे के बाद सफल ऑपरेशन किया।
उन्होंने बताया कि ट्यूमर के कारण ऑप्टिक नर्व प्रभावित हो रहा था। जिससे दोनों आंखों की रोशनी खत्म हो चुकी थी। डॉ. मेहता ने बताया कि आज तक ऐसे मामलों में रोशनी नहीं आती है, लेकिन इसमें ब्रेन ट्यूमर ठीक आंखों के बीच था। जब उसे टुकड़ों में निकाला गया तो करीब दो घंटे बाद ही रोशनी आ गई।